GCC के महासचिव Jasem Mohamed Albudaiwi ने साफ कहा है कि ईरान के लगातार हमलों की वजह से अब GCC देशों को अपनी रणनीति बदलनी होगी। अब केवल आपसी बातचीत और तालमेल से काम नहीं चलेगा, बल्कि सभी सदस्य देशों को अपनी सुरक्षा और सैन्य ताकत को एक साथ जोड़ना होगा ताकि वे खुद को सुरक्षित रख सकें।

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ईरान की हरकतों से GCC देशों में क्यों बढ़ा तनाव?

GCC महासचिव ने बताया कि 28 फरवरी 2026 से ईरान ने सदस्य देशों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं। इन हमलों में आम लोगों और जरूरी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। 28 अप्रैल 2026 को जेद्दा में हुई 19वीं परामर्श बैठक के दौरान यह बात सामने आई कि अब ईरान पर भरोसा पूरी तरह खत्म हो चुका है। इसी वजह से सभी सदस्य देशों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत अपने आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करने का फैसला किया है।

GCC देशों ने सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए हैं?

  • UN की मदद: महासचिव ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से ईरान के हमलों को तुरंत रोकने की मांग की और प्रस्ताव 2817 का जिक्र किया।
  • समुद्री रास्ता: Strait of Hormuz में जहाजों के आने-जाने की आजादी को सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया है।
  • विदेशी संबंध: क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए यूरोपीय संघ (EU) के साथ रिश्तों को और बेहतर बनाने की बात कही गई है।
  • ईरान से शर्त: कोई भी समझौता तभी होगा जब ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमताओं और क्षेत्रीय गतिविधियों पर लगाम लगाएगा।

क्षेत्रीय सुरक्षा और सैन्य एकीकरण का क्या मतलब है?

साधारण शब्दों में इसका मतलब है कि अब GCC के देश सिर्फ अपनी अलग-अलग सेनाओं पर निर्भर नहीं रहेंगे। वे अपनी रक्षा प्रणालियों और सैन्य रणनीतियों को एक साथ मिलाएंगे। 23 मार्च 2026 को दिए गए बयान में स्पष्ट किया गया कि सीधे खतरों की वजह से सैन्य एकीकरण अब जरूरी हो गया है। यह पूरा फैसला मार्च 2024 में मंजूर हुए क्षेत्रीय सुरक्षा विजन का हिस्सा है ताकि पूरे इलाके में स्थिरता बनी रहे।

Frequently Asked Questions (FAQs)

GCC महासचिव ने ईरान के बारे में क्या कहा?

उन्होंने कहा कि ईरान के हमलों की वजह से अब GCC देशों को केवल तालमेल बिठाने के बजाय अपनी सुरक्षा प्रणालियों को पूरी तरह से एकीकृत (integrate) करना होगा।

ईरान के हमले कब शुरू हुए?

महासचिव के अनुसार 28 फरवरी 2026 से ईरान ने GCC देशों के बुनियादी ढांचे और नागरिकों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले शुरू किए थे।