गल्फ देशों और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक बड़ी मीटिंग हुई है। GCC के महासचिव जस़ेम मोहम्मद अल्बुदैवी ने ईरान द्वारा किए जा रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद मांगी है। इन हमलों का सीधा असर समुद्री रास्तों और तेल की सप्लाई पर पड़ रहा है, जिससे खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और व्यापार पर प्रभाव पड़ सकता है। महासचिव ने साफ कहा कि यह सिर्फ एक छोटा संकट नहीं है बल्कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा की परीक्षा है।

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UN सुरक्षा परिषद में गल्फ देशों ने क्या मांग रखी?

GCC महासचिव ने सुरक्षा परिषद को बताया कि 28 फरवरी से अब तक ईरान ने गल्फ देशों और जॉर्डन पर 5,000 से ज्यादा मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। इसमें सबसे ज्यादा हमला UAE पर हुआ है। उन्होंने सुरक्षा परिषद से मांग की है कि ईरान के हमलों को रोकने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं। इसके अलावा, खाड़ी देशों ने यह भी कहा कि ईरान के साथ होने वाली किसी भी भविष्य की बातचीत या समझौते में GCC देशों को भी शामिल किया जाना चाहिए ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे।

समुद्री रास्तों और Strait of Hormuz को लेकर क्या है अपडेट?

बैठक में यह जानकारी दी गई कि ईरान ने Strait of Hormuz को बंद कर दिया है और वहां से गुजरने वाले जहाजों पर अवैध शर्तें और फीस लगा दी है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल की सप्लाई पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। बहरीन ने सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव भी रखा है ताकि समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखा जा सके। वहीं, ब्रिटेन ने भी ईरान के इन हमलों की निंदा की और बताया कि वे 40 से ज्यादा देशों के साथ मिलकर रास्तों को सुरक्षित बनाने पर काम कर रहे हैं।

ईरान और गल्फ देशों के बीच तनाव का मुख्य ब्यौरा

तारीख प्रमुख घटनाक्रम
28 फरवरी 2026 ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू हुए
12 मार्च 2026 UN सुरक्षा परिषद ने हमलों की कड़ी निंदा की
2 अप्रैल 2026 GCC महासचिव ने UN में सुरक्षा परिषद को ब्रीफिंग दी
3 अप्रैल 2026 सुरक्षा परिषद में बहरीन के प्रस्ताव पर वोटिंग की संभावना

गल्फ देशों ने स्पष्ट किया है कि उनके पास आत्मरक्षा का पूरा अधिकार है, लेकिन वे फिर भी बातचीत और कूटनीति के जरिए मामले को सुलझाना चाहते हैं। UN की इस बैठक में समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद जैसे साझा मुद्दों पर भी चर्चा हुई। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और वहां की सुरक्षा के लिहाज से यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है।