GCC और साउथ कोरिया के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हुई बड़ी चर्चा, जल्द लागू होगा नया व्यापार समझौता

गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल यानी GCC के महासचिव जसिम मोहम्मद अल-बुदैवी ने 23 अगस्त 2026 को सऊदी अरब में साउथ कोरिया के राजदूत कांग शिन-चुल से अहम मुलाकात की। इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी एफटीए की प्रगति पर चर्चा करना था। सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, यह बातचीत इस बड़े आर्थिक समझौते को जल्द से जल्द लागू करने और इसके अंतिम चरणों को पूरा करने पर केंद्रित रही, जिससे खाड़ी देशों और कोरिया के बीच व्यापारिक रिश्ते और अधिक मजबूत होंगे।
यह अहम बैठक दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में मजबूत हुई साझेदारियों की कड़ी का हिस्सा है। इससे पहले दिसंबर 2023 में, GCC के महासचिव अल-बुदैवी और साउथ कोरिया के तत्कालीन व्यापार मंत्री आन डुकग्यून ने सियोल में एक औपचारिक समझौते पर सहमति जताई थी। इस शुरुआती समझौते में व्यापार से जुड़े कुल 18 चैप्टर शामिल किए गए थे, जिनमें सामानों का आदान-प्रदान, सर्विसेज, डिजिटल ट्रेड, सरकारी खरीद, कस्टम ड्यूटी और बौद्धिक संपदा यानी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी जैसे अहम विषय शामिल थे। उस समय यह उम्मीद जताई गई थी कि इस समझौते को साल 2024 के अंत तक पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा।
साइन हुआ औपचारिक समझौता
लंबे समय से चल रही वार्ताओं और प्रक्रियाओं के बाद, हाल ही में 8 जून 2026 को इस ऐतिहासिक समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए गए। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, यह हस्ताक्षर समारोह गल्फ और कोरियाई देशों के बीच आर्थिक एकीकरण की दिशा में एक बहुत बड़ा और निर्णायक कदम साबित हुआ है। इस समझौते के पूरी तरह जमीन पर उतरने से दोनों क्षेत्रों के व्यापारियों को काफी फायदा मिलेगा और आयात-निर्यात प्रक्रिया भी बेहद आसान हो जाएगी। इस बारे में अधिक जानकारी आधिकारिक Saudi Press Agency (SPA) रिपोर्ट में साझा की गई है।
खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और विशेष रूप से भारतीय कामगारों व व्यापारियों के लिए यह एक सकारात्मक खबर है। जब भी खाड़ी देशों और बड़े एशियाई देशों के बीच व्यापारिक समझौते होते हैं, तो वहां रोजगार और बिजनेस के नए रास्ते खुलते हैं। डिजिटल ट्रेड और सेवाओं के क्षेत्र में नए नियम आने से उन प्रोफेशनल्स को फायदा मिलता है जो इन देशों में रहकर काम करते हैं। आने वाले दिनों में इस समझौते के पूरी तरह लागू होने के बाद बाजार में और अधिक कारोबारी गतिविधियां देखने को मिलेंगी।