अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अब दुनिया भर की चिंता बढ़ा दी है. जर्मनी के चांसलर Friedrich Merz ने अमेरिका की रणनीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा है कि अमेरिका के पास इस युद्ध से बाहर निकलने का कोई साफ रास्ता नहीं है और ईरान का नेतृत्व अमेरिका को नीचा दिखा रहा है.

अमेरिका की रणनीति और जर्मनी की चिंता क्या है?

चांसलर Friedrich Merz ने Marsberg के छात्रों से बात करते हुए कहा कि अमेरिका बिना किसी ठोस रणनीति के ईरान के साथ युद्ध लड़ रहा है. उन्होंने बताया कि ईरान बातचीत करने में बहुत माहिर है और वह अमेरिका को इस तरह उलझा रहा है कि अमेरिकी अधिकारी पाकिस्तान जैसे देशों की यात्रा तो कर रहे हैं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल रहा. मर्ज़ ने यह भी साफ किया कि 28 फरवरी को जब अमेरिका और Israel ने ईरान पर हमला शुरू किया, तब जर्मनी और यूरोप के देशों से कोई सलाह नहीं ली गई थी. उन्होंने इस स्थिति की तुलना इराक और अफगानिस्तान के पुराने युद्धों से की.

Strait of Hormuz और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ा है?

समुद्री व्यापार के लिए बेहद जरूरी Strait of Hormuz में बारूदी सुरंगें बिछाई गई हैं, जिससे जहाजों के आने-जाने में खतरा बढ़ गया है. जर्मनी ने मदद के लिए माइन्सवीपर जहाज भेजने की पेशकश की है, लेकिन इसके लिए उन्हें संसद की मंजूरी और अंतरराष्ट्रीय आदेश की जरूरत होगी. इस पूरे विवाद का सीधा असर जर्मनी की आर्थिक स्थिति पर पड़ा है, जिससे वहां की आर्थिक तरक्की के अनुमान को घटा दिया गया है. साथ ही, दुनिया भर में तेल की कीमतों में भी बढ़ोत्तरी देखी गई है.

शांति वार्ता और ताज़ा हालात क्या हैं?

  • ईरान की हलचल: ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi पाकिस्तान और ओमान में बातचीत विफल होने के बाद अब रूस चले गए हैं.
  • अमेरिका का फैसला: राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने दूतों Steve Witkoff और Jared Kushner की पाकिस्तान यात्रा रद्द कर दी है क्योंकि ईरानी विदेश मंत्री उनके आने से पहले ही वहां से चले गए.
  • नया प्रस्ताव: ईरान ने पाकिस्तान के जरिए एक प्रस्ताव भेजा है जिसमें Strait of Hormuz को खोलने की बात कही गई है, लेकिन इसमें परमाणु कार्यक्रम पर कोई बात नहीं है.
  • व्हाइट हाउस का जवाब: प्रवक्ता Olivia Wales ने कहा है कि अमेरिका प्रेस के जरिए बातचीत नहीं करेगा और वह ऐसा समझौता ही करेगा जिससे अमेरिकी लोगों का फायदा हो और ईरान के पास परमाणु हथियार न हों.