जर्मन चांसलर Friedrich Merz ने ईरान में जारी सैन्य संघर्ष को लेकर अपनी राय रखी है। 27 मार्च 2026 को दिए गए बयान में उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल ईरान में शासन बदलने के अपने लक्ष्य में शायद ही सफल हो पाएं। उन्होंने इस तरह के सैन्य अभियानों की सफलता पर गंभीर संदेह जताया है। वहीं अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह ऑपरेशन अब महीनों के बजाय कुछ हफ्तों में खत्म हो सकता है।

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ईरान में चल रही जंग की कुछ अहम बातें

जर्मन चांसलर Friedrich Merz ने फ्रैंकफर्ट में एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि शासन बदलने की रणनीति अक्सर नाकाम रहती है। उन्होंने इसके लिए पुराने युद्धों का उदाहरण दिया और कहा कि जर्मनी इस लड़ाई का हिस्सा नहीं बनेगा। दूसरी तरफ इजराइल ने ईरान के अराक और अर्दकान में बने परमाणु केंद्रों पर हमले किए हैं। ईरान की परमाणु एजेंसी का कहना है कि इन हमलों से फिलहाल कोई रेडियोधर्मी खतरा पैदा नहीं हुआ है।

  • जर्मनी ने साफ किया है कि अगर उनसे सलाह ली जाती तो वे इस जंग के खिलाफ होते।
  • अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio का कहना है कि ईरान ने बातचीत के लिए कुछ संदेश भेजे हैं।
  • G7 देशों के विदेश मंत्रियों ने नागरिकों पर हो रहे हमलों को तुरंत रोकने की अपील की है।
  • अमेरिकी और इजराइली सेना अब अपना ध्यान शासन बदलने से हटाकर ईरान की सैन्य शक्ति कम करने पर लगा रही है।

संघर्ष से जुड़े कुछ प्रमुख आंकड़े और अपडेट

इस जंग में अब तक के नुकसान और ताजा घटनाक्रमों को नीचे दी गई तालिका में समझा जा सकता है। इसमें सैनिकों के घायल होने से लेकर साइबर हमलों तक की जानकारी शामिल है।

विषय जानकारी
अमेरिकी सैनिकों की स्थिति 28 फरवरी से अब तक 300 से ज्यादा सैनिक घायल हुए हैं
जर्मनी का रुख जर्मनी ने इस युद्ध में शामिल होने से पूरी तरह इनकार कर दिया है
साइबर हमला हैकर्स ने FBI डायरेक्टर Kash Patel का ईमेल अकाउंट हैक कर निजी जानकारी लीक की
समुद्री सुरक्षा हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करने की मांग की गई है
Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.