भारत में जर्मनी के राजदूत Philipp Ackermann ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अपनी राय रखी है. उन्होंने बताया कि ईरान के साथ चल रही बातचीत से उन्हें काफी उम्मीद है, लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच शांति की संभावना फिलहाल कम दिख रही है.

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जर्मन राजदूत ने गुरुवार, 26 जून 2026 को कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर जो 60 दिनों की बातचीत चल रही है, उसके सफल होने की पूरी उम्मीद है. उन्होंने बताया कि हाल ही में संघर्ष रुकने के बाद अब शांति समझौतों पर चर्चा सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है.

ईरान परमाणु बातचीत का पूरा मामला

इस बातचीत से जुड़ी कुछ अहम जानकारियाँ सामने आई हैं:

  • 22 जून 2026: पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान एक रोडमैप पर सहमत हुए, ताकि 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौता हो सके.
  • इस चर्चा का मुख्य लक्ष्य ईरान और अमेरिका के बीच पुराने विवादों को खत्म करना और परमाणु कार्यक्रम का समाधान निकालना है.
  • पिछले हफ्ते एक समझौता ज्ञापन (MoU) साइन किया गया था, जिससे आपसी लड़ाई रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने की कोशिश की गई.

हालांकि, इस बीच कुछ मतभेद भी दिखे हैं. UN की परमाणु एजेंसी के प्रमुख Rafael Mariano Grossi ने कहा कि इंस्पेक्टर ईरान के परमाणु साइट्स का दौरा करेंगे, लेकिन ईरान के एक राजनयिक ने साफ किया कि यह दौरा अंतिम समझौते के बाद ही संभव होगा. वहीं, इस बीच 24 जून 2026 को इसराइल और हिजबुल्लाह के बीच हुई लड़ाई ने इलाके की शांति को फिर से खतरे में डाल दिया.

रूस-यूक्रेन युद्ध पर चिंता

दूसरी तरफ, Philipp Ackermann ने रूस-यूक्रेन युद्ध के जल्द खत्म होने की उम्मीद कम जताई है. उन्होंने कहा कि रूस अभी कूटनीतिक बातचीत के लिए तैयार नहीं है, जिसकी वजह से मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है.

जर्मन चांसलर Friedrich Merz ने 25 जून 2026 को युद्ध रोकने और फ्रंट लाइन को फ्रीज करने की अपील की थी ताकि जान-माल का नुकसान रुके. उन्होंने माना कि रूस यूरोपीय देशों के साथ सीधे बात करने से बच रहा है और अपनी पुरानी मांगों पर अड़ा है. साथ ही यह भी जानकारी मिली कि यूक्रेन अब रूस के अंदरूनी हिस्सों पर हमला करने के लिए नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहा है.