Germany ने अपनी नौसेना के एक माइन्सवीपर यानी खदान हटाने वाले जहाज को Mediterranean सागर में भेजने का फैसला किया है. यह कदम Strait of Hormuz में होने वाले किसी भी संभावित मिशन की तैयारी के लिए उठाया गया है. रक्षा मंत्री Boris Pistorius ने जर्मन अखबार Rheinische Post को इस योजना के बारे में जानकारी दी है.

जर्मनी की तैनाती के लिए क्या हैं जरूरी शर्तें?

रक्षा मंत्री Boris Pistorius और चांसलर Friedrich Merz ने स्पष्ट किया है कि Strait of Hormuz में जहाज भेजने के लिए कुछ शर्तें पूरी होनी चाहिए. सबसे पहले अमेरिका और ईरान के बीच एक स्थायी युद्धविराम होना जरूरी है. इसके अलावा, इस मिशन के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत एक कानूनी ढांचा, जैसे कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव होना चाहिए. इस पूरे मिशन के लिए जर्मन संसद यानी Bundestag की मंजूरी भी अनिवार्य होगी. जर्मनी का मकसद केवल समुद्री रास्तों की आजादी को बचाना है.

Strait of Hormuz में तनाव और अन्य देशों की तैयारी

Strait of Hormuz में इस समय ईरान ने नाकाबंदी कर रखी है, जिससे जहाजों की आवाजाही में दिक्कत आ रही है. हाल ही में 24 अप्रैल 2026 को अमेरिकी सेना (CENTCOM) ने एक ईरानी जहाज को बीच रास्ते में रोका था. इस संकट से निपटने के लिए फ्रांस और ब्रिटेन एक अंतरराष्ट्रीय मिशन का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसमें लगभग 50 देश चर्चा कर रहे हैं. जर्मनी NATO में माइन्स हटाने के काम में माहिर है, इसलिए वह अपनी विशेषज्ञता के आधार पर इस मिशन में मदद कर सकता है.