जर्मनी ने लाल सागर में अपने दो युद्धपोत भेजने का फैसला किया है। रक्षा मंत्री Boris Pistorius ने गुरुवार, 18 जून 2026 को यह जानकारी दी। यह कदम होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक संभावित सैन्य मिशन की तैयारी के लिए उठाया गया है।
इन जहाजों के नाम Fulda (माइनस्वीपर) और Mosel (सप्लाई शिप) हैं। फिलहाल ये दोनों जहाज स्वेज नहर के रास्ते लाल सागर की ओर जा रहे हैं। रक्षा मंत्री ने ब्रसेल्स में एक NATO मीटिंग के दौरान यह बात मीडिया को बताई।
इस मिशन को लेकर जर्मनी ने कुछ शर्तें रखी हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि माइनस्वीपिंग ऑपरेशन शुरू करने के लिए ईरान और ओमान दोनों देशों की मंजूरी जरूरी होगी। साथ ही, इस मिशन के लिए जर्मन संसद (Bundestag) की अनुमति और एक अंतरराष्ट्रीय कानूनी आदेश का होना भी अनिवार्य होगा।
जर्मनी के विदेश मंत्री Johann Wadephul ने 16 जून को बताया कि कोई भी ऑपरेशन पूरी तरह शांतिपूर्ण होना चाहिए और इसमें सभी संबंधित पक्षों की सहमति होनी चाहिए। जर्मनी अभी अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया समझौते की बारीकियों का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद संसद से मंजूरी मांगी जाएगी।
यह पूरा मामला अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस्लामाबाद मेमोरेंडम के बाद शुरू हुआ है। इस समझौते के तहत ईरान जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और अमेरिका द्वारा अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने की उम्मीद है। इस समझौते पर 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर होंगे।
दूसरी तरफ ईरान के शीर्ष वार्ताकार Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा है कि इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से अब टोल वसूला जाएगा। वहीं एस्टोनिया के रक्षा मंत्री Hanno Pevkur ने भी कहा कि समुद्री रास्तों की आजादी और सुरक्षा सुनिश्चित करने में यूरोपीय देशों की भागीदारी जरूरी है।