जर्मनी के विदेश मंत्री Johann Wadephul ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने साफ कहा है कि ईरान को अपने परमाणु हथियारों के प्रोग्राम को पूरी तरह और प्रमाणित तरीके से बंद करना होगा. इस मामले में जर्मनी अमेरिका के रुख का समर्थन कर रहा है और चाहता है कि बातचीत के जरिए इस विवाद को सुलझाया जाए.

जर्मनी और अमेरिका की ईरान से क्या मांग है?

3 मई 2026 को जर्मनी के विदेश मंत्री Johann Wadephul ने ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi से फोन पर बात की. जर्मनी ने मांग की कि ईरान परमाणु हथियार बनाना बंद करे और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को अपने केंद्रों में पूरी पहुंच दे. इसके साथ ही, जर्मनी ने रणनीतिक Strait of Hormuz को तुरंत खोलने को कहा है. दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ईरान के शांति प्रस्ताव की जांच कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने संदेह जताया है कि ईरान ने अब तक कोई बड़ी कीमत नहीं चुकाई है. ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने गलत व्यवहार किया तो फिर से हमले हो सकते हैं.

ईरान का क्या जवाब है और मौजूदा हालात क्या हैं?

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अपने टेलीग्राम चैनल पर कहा कि वे इस युद्ध को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे अमेरिका और इजरायल ने शुरू किया है. वहीं, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिका को अल्टीमेटम दिया है कि वह ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म करे. ईरान ने पाकिस्तान के जरिए 14 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा है, जिसमें पहले नाकेबंदी हटाने और फिर परमाणु चर्चा करने की बात कही गई है, लेकिन अमेरिका ने इस क्रम को मानने से इनकार कर दिया है.

अमेरिका और जर्मनी के रिश्तों पर क्या असर पड़ा?

ईरान विवाद को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जर्मन चांसलर Friedrich Merz के बीच मतभेद बढ़ गए हैं. इस तनाव की वजह से पेंटागन जर्मनी से अपने लगभग 5,000 अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने की योजना बना रहा है. माना जा रहा है कि ट्रंप यूरोपीय देशों से मिलने वाली मदद से खुश नहीं हैं.

Frequently Asked Questions (FAQs)

जर्मनी ने ईरान से मुख्य रूप से क्या मांग की है?

जर्मनी ने मांग की है कि ईरान अपने परमाणु हथियारों के प्रोग्राम को पूरी तरह खत्म करे, IAEA को पूरी पहुंच दे और Strait of Hormuz को तुरंत खोले.

अमेरिका और ईरान के बीच शांति प्रस्ताव की क्या स्थिति है?

ईरान ने पाकिस्तान के जरिए 14 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा है, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप इस पर संदेह जता रहे हैं और उन्होंने कहा है कि कोई भी समझौता परमाणु हथियारों के खिलाफ ठोस गारंटी के साथ होना चाहिए.

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.