जर्मनी ने दुनिया भर के व्यापार और बढ़ते तेल दामों को देखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है. जर्मन रक्षा मंत्री Boris Pistorius ने ऐलान किया कि जर्मनी की नौसेना अब भूमध्य सागर (Mediterranean) में तैनात होगी. यह कदम हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सुरक्षा बढ़ाने की तैयारी का हिस्सा है ताकि जहाजों का रास्ता सुरक्षित रहे.
जर्मनी क्यों भेज रहा है अपने युद्धपोत?
ईरान ने 28 फरवरी को अमेरिका और इसराइल के हमलों के जवाब में हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था. इस वजह से पूरी दुनिया में व्यापार में भारी रुकावट आई है और ऊर्जा की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं. जर्मनी अब वहां माइन स्वीपर और कमांड सप्लाई शिप भेजने की तैयारी कर रहा है. इनका मुख्य काम समुद्री रास्ते से बारूदी सुरंगों को हटाना और निगरानी करना होगा.
हॉर्मुज़ में तैनाती के लिए क्या हैं शर्तें?
रक्षा मंत्री Boris Pistorius ने साफ किया कि हॉर्मुज़ में तैनाती के लिए कुछ शर्तें पूरी होनी चाहिए. सबसे पहले इलाके में स्थायी युद्धविराम होना जरूरी है, अंतरराष्ट्रीय कानून का ढांचा तैयार हो और जर्मनी की संसद (Bundestag) से इसकी मंजूरी मिले. चांसलर Friedrich Merz ने भी कहा है कि जर्मनी अमेरिका के साथ मिलकर इस बहुराष्ट्रीय मिशन का हिस्सा बनने के लिए तैयार है.
अब तक क्या हुआ और आगे क्या होगा?
मार्च 2026 के बीच में जर्मनी ने ट्रंप की मांग पर सेना भेजने से मना कर दिया था क्योंकि उन्हें ईरान के साथ सीधे टकराव का डर था. लेकिन अप्रैल के मध्य तक हालात बदले और अधिकारियों ने तैयारी शुरू कर दी. अब 25 अप्रैल 2026 को आधिकारिक तौर पर भूमध्य सागर में यूनिट्स भेजने का ऐलान हुआ है. इस मिशन का मकसद केवल जहाजों के आने-जाने की आजादी को फिर से बहाल करना है.