जर्मनी अब होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में मिशन के लिए पूरी तरह तैयार है। जर्मन रक्षा मंत्री Boris Pistorius ने ऐलान किया है कि वे जल्द ही भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) में अपनी नौसेना की टुकड़ियाँ भेजेंगे। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि ज़रूरत पड़ने पर वे तुरंत एक्शन ले सकें और समय बचाया जा सके।

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जर्मनी कौन से युद्धपोत भेज रहा है और क्यों?

रक्षा मंत्री Boris Pistorius ने बताया कि आने वाले कुछ दिनों में ‘Fulda’ नाम का एक माइनहंटर (minehunter) और एक कमांड व सप्लाई शिप भूमध्य सागर में भेजे जाएंगे। जर्मनी का मकसद यह है कि जब भी उन्हें मिशन का आदेश मिले, तो वे बिना समय गंवाए अपनी कार्रवाई शुरू कर सकें। जर्मन चांसलर Friedrich Merz ने भी इस बात का समर्थन किया है कि जर्मनी इस अंतरराष्ट्रीय मिशन का हिस्सा बनेगा, जिसमें अमेरिका की भूमिका अहम होगी।

जर्मनी की शर्तें क्या हैं?

जर्मनी ने इस तैनाती के लिए कुछ ज़रूरी शर्तें रखी हैं, जिनके बिना वे आगे नहीं बढ़ेंगे:

  • शांति की शर्त: अमेरिका और इसराइल का ईरान के साथ चल रहा युद्ध पूरी तरह रुकना चाहिए।
  • संसद की मंजूरी: इस मिशन के लिए जर्मन संसद (Bundestag) की मंजूरी लेना ज़रूरी है।
  • कानूनी ढांचा: यह पूरा मिशन अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में होना चाहिए।
  • रास्ता: रक्षा मंत्री ने सुझाव दिया है कि लाल सागर में चल रहे EU के ‘Aspides’ मिशन का विस्तार किया जा सकता है, हालांकि UN का आदेश ज़्यादा बेहतर होगा।

इस पूरी स्थिति का दुनिया पर क्या असर होगा?

फिलहाल ईरान के नियंत्रण की वजह से होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद है। इसका सीधा असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, सप्लाई चेन और तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। वहीं दूसरी तरफ, अमेरिका और ईरान के बीच शांति बातचीत की उम्मीद है, जिसके लिए इस वीकेंड पाकिस्तान में नई चर्चाएं हो सकती हैं। जर्मनी अपनी नौसेना की अन्य जिम्मेदारियों को कम करके इस मिशन को प्राथमिकता देने के लिए तैयार है।