जर्मनी ने ईरान की हरकतों के बीच एक बड़ा कदम उठाया है. जर्मनी का माइनस्वीपर जहाज Fulda बाल्टिक सागर के कील-विक नेवल बेस से निकलकर अब मेडिटेरेनियन सागर की तरफ बढ़ रहा है. यह कदम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है ताकि समुद्री व्यापार में कोई बड़ी रुकावट न आए.

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जर्मनी के मिशन में शामिल होने की शर्तें क्या हैं?

जर्मनी इस मिशन में पूरी तरह तभी शामिल होगा जब कुछ खास शर्तें पूरी होंगी. जर्मन रक्षा मंत्री Boris Pistorius ने बताया कि इस मिशन के लिए जर्मन संसद (Bundestag) की मंजूरी मिलना जरूरी है. इसके अलावा, युद्ध का पूरी तरह से रुकना और एक स्पष्ट कानूनी आदेश का होना भी आवश्यक है.

  • मिशन का हिस्सा संयुक्त राष्ट्र, NATO या यूरोपीय संघ जैसे सामूहिक सुरक्षा तंत्र होना चाहिए.
  • जर्मनी इस मिशन को अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय पार्टनर्स के सहयोग से चलाने की योजना बना रहा है.
  • जर्मनी का एक और सपोर्ट जहाज Mosel भी इस इलाके में भेजने की तैयारी में है.

खाड़ी देशों और समुद्री रास्तों पर क्या असर पड़ रहा है?

ईरान द्वारा किए गए हमलों की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में काफी तनाव है. अमेरिका ने जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए Project Freedom शुरू किया है. हाल ही में 5 मई 2026 को UAE में ईरान की तरफ से मिसाइल और ड्रोन हमले हुए हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है.

जर्मनी का जहाज Fulda पहले NATO के माइन काउंटरमेजर्स ग्रुप 2 में शामिल होगा. जर्मनी ने यह भी स्वीकार किया है कि होर्मुज की तेज गर्मी और खारा पानी उनके जहाजों के सोनार सिस्टम के लिए तकनीकी चुनौती पैदा कर सकता है. इसलिए इस मिशन में बिना इंसान वाले (unmanned) सिस्टम और अन्य देशों के जहाजों का साथ बहुत जरूरी होगा.

Frequently Asked Questions (FAQs)

जर्मनी का कौन सा जहाज भेजा गया है और उसका काम क्या है

जर्मनी ने Fulda नाम का माइनस्वीपर जहाज भेजा है. इसका मुख्य काम समुद्र में बिछी बारूदी सुरंगों (mines) को खोजना और उन्हें नष्ट करना है ताकि व्यापारिक जहाज सुरक्षित निकल सकें.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव का मुख्य कारण क्या है

ईरान द्वारा व्यापारिक जहाजों और बुनियादी ढांचे पर हमलों के कारण वहां खतरा बढ़ा है. इस वजह से जहाजों के रास्ते बंद होने की स्थिति बन गई है, जिसे रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाया जा रहा है.