Strait of Hormuz को लेकर दुनिया भर में तनाव बढ़ा हुआ है। जर्मनी ने साफ़ कर दिया है कि वह इस इलाके में अपनी सेना नहीं भेजेगा। जर्मन अधिकारियों का मानना है कि यह रास्ता इतनी जल्दी नहीं खुलेगा। इस वजह से वैश्विक व्यापार और तेल की सप्लाई पर असर पड़ने का खतरा बढ़ गया है।
जर्मनी ने क्या कहा और उसका रुख क्या है?
जर्मन विदेश मंत्री Johann Wadephul ने 15 अप्रैल 2026 को साफ़ किया कि जर्मनी मर्चेंट जहाजों की सुरक्षा के लिए किसी भी अंतरराष्ट्रीय सैन्य मिशन में शामिल नहीं होगा। इससे पहले रक्षा मंत्री Boris Pistorius ने भी कहा था कि जर्मनी अपनी नौसेना नहीं भेजेगा क्योंकि यह उनकी लड़ाई नहीं है। उन्होंने इस पूरे विवाद को बातचीत और डिप्लोमेसी से सुलझाने की बात कही थी।
Strait of Hormuz में आखिर चल क्या रहा है?
मार्च 2026 की शुरुआत से इस अहम समुद्री रास्ते में काफी दिक्कतें आ रही हैं। ईरान पर आरोप लगा है कि उसने इस रास्ते को बंद किया है, जहाजों पर हमले किए हैं और समुद्र में बारूद बिछाया है। वहीं अमेरिका और इसराइल का ईरान के साथ 28 फरवरी 2026 से बड़ा संघर्ष चल रहा है, जिससे पूरे इलाके में तनाव चरम पर है।
क्या रास्ता खोलने के लिए कोई दूसरा प्लान है?
ब्रिटेन और फ्रांस मिलकर एक अलग योजना पर काम कर रहे हैं। वे अमेरिका की मदद के बिना Strait of Hormuz को फिर से खोलने की कोशिश कर रहे हैं। इस प्लान के तहत एक अंतरराष्ट्रीय फोर्स बनाई जाएगी जो केवल समुद्री रास्तों से बारूद हटाएगी और जहाजों को सुरक्षा देगी। फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने इसे केवल बचाव का मिशन बताया है।
