जर्मनी ने ऐलान किया है कि वह Strait of Hormuz की सुरक्षा में मदद करने के लिए तैयार है. हालांकि, यह मदद तब शुरू होगी जब अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध पूरी तरह खत्म हो जाएगा. जर्मन सरकार ने साफ किया है कि वह शांति समझौते के बाद ही इस मिशन में शामिल होगा.

जर्मनी की मदद के लिए क्या हैं शर्तें?

जर्मन चांसलर Friedrich Merz ने बताया कि सुरक्षा मिशन के लिए अंतरराष्ट्रीय मंजूरी जरूरी है. वह चाहते हैं कि इस मिशन को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) से हरी झंडी मिले. इसके साथ ही जर्मनी की संसद (Bundestag) से भी मंजूरी लेनी होगी, जिसके बिना सेना नहीं भेजी जा सकती.

युद्ध और वर्तमान स्थिति क्या है?

अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच फरवरी 2026 से युद्ध चल रहा है. पाकिस्तान की मदद से 8 अप्रैल को दो हफ्ते के लिए युद्ध विराम हुआ था. जर्मन विदेश मंत्री Johann Wadephul ने ईरान से अपील की है कि वह अमेरिका के साथ ceasefire का पालन करे और जहाजों के सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करे.

क्या जर्मनी अभी युद्ध में शामिल है?

रक्षा मंत्री Boris Pistorius ने साफ कर दिया है कि जर्मनी इस युद्ध का हिस्सा नहीं है. जर्मनी ने अभी केवल शांति के बाद मदद करने की बात कही है. वहीं, CDU एक्सपर्ट Jürgen Hardt ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए नाकाबंदी के खतरे को केवल बातचीत की एक तकनीक माना जाना चाहिए.

Nura Basta

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