जर्मनी के विदेश मंत्री Johann Wadephul ने ईरान से अपील की है कि वह इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ शांति से बातचीत करे। उन्होंने कहा कि ईरान को अपनी जनता की भलाई के लिए इस मौके का फायदा उठाना चाहिए। हालांकि, ईरान ने इस बात को पूरी तरह नकार दिया है और उसने किसी भी प्रतिनिधिमंडल को पाकिस्तान भेजने से मना कर दिया है।

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ईरान ने बातचीत करने से क्यों किया इनकार

ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के साथ दूसरे दौर की बातचीत के लिए नहीं जाएगा। ईरान का कहना है कि अमेरिका की शर्तें बहुत ज्यादा कठिन हैं और उसकी उम्मीदें असलियत से दूर हैं। साथ ही, अमेरिका ने Strait of Hormuz पर जो नौसेना की घेराबंदी की है, उसकी वजह से भी ईरान नाराज है। ईरान के सैन्य कमांडर मेजर जनरल Abdollahi ने चेतावनी दी है कि अगर कोई भी हमला हुआ तो उसकी सेना तुरंत और कड़ा जवाब देगी।

अमेरिका और अन्य देशों का क्या कहना है

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने बताया कि उपराष्ट्रपति JD Vance बातचीत के लिए इस्लामाबाद जाने को तैयार थे, लेकिन ईरान के इनकार के बाद अब उम्मीदें कम हो गई हैं। पाकिस्तान इस पूरे मामले में बीच-बचाव कर रहा है और प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने इस बारे में ईरान के राष्ट्रपति से फोन पर बात की है। चीन ने भी दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है ताकि युद्ध को खत्म किया जा सके।

विवरण जानकारी
तारीख 21 अप्रैल 2026
जर्मनी का रुख ईरान को अमेरिका से बातचीत की सलाह दी
अमेरिका का रुख उपराष्ट्रपति JD Vance बातचीत के लिए तैयार थे
ईरान का जवाब बातचीत के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजने से इनकार किया
इनकार का कारण कठिन शर्तें और नौसेना की घेराबंदी
पाकिस्तान की भूमिका मध्यस्थता और बातचीत की सुविधा देना
चीन की अपील शांति वार्ता को जारी रखने की मांग
Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.