ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे युद्ध ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है. जर्मनी ने अब संयुक्त राष्ट्र (UN) से इस मामले में तुरंत दखल देने की मांग की है. खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से पूरी दुनिया में सामानों की सप्लाई और खाने-पीने की चीजों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है.

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Strait of Hormuz के बंद होने से क्या मुसीबत आएगी

जर्मनी के विदेश मंत्री Johann Wadephul ने कहा है कि ईरान द्वारा Strait of Hormuz को बंद करने से ग्लोबल इकोनॉमी को भारी नुकसान हो रहा है. इसका सबसे बुरा असर गरीब देशों पर पड़ेगा और दुनिया में खाने की कमी होने का डर है. उन्होंने UN से अपील की है कि वह इस विवाद को सुलझाने में मुख्य भूमिका निभाए ताकि व्यापार फिर से शुरू हो सके. उन्होंने UN सुरक्षा परिषद के कुछ सदस्यों की आलोचना भी की जो फैसलों में बाधा डाल रहे हैं.

ईरान और अन्य देशों के बीच क्या चल रही है बातचीत

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi इस विवाद को सुलझाने के लिए पाकिस्तान और ओमान के दौरे के बाद अब रूस पहुंचे हैं, जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से होगी. दूसरी तरफ जर्मनी के चांसलर Friedrich Merz ने अमेरिका की रणनीति पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि अमेरिका के पास इस युद्ध से बाहर निकलने की कोई सही योजना नहीं है. उन्होंने ईरान के बातचीत करने के तरीके को भी काफी पेचीदा बताया है.

जर्मनी सरकार ने अपने नागरिकों के लिए क्या ऐलान किया

युद्ध की वजह से जर्मनी की आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ा है, जिससे वहां की विकास दर (growth forecast) कम हो गई है. सरकार ने आम लोगों और बिजनेस की मदद के लिए कुछ राहत उपायों की घोषणा की है:

  • एनर्जी टैक्स में कटौती की जाएगी ताकि खर्च कम हो.
  • घरानों और बिजनेस को टैक्स-फ्री ‘रिलीफ बोनस’ दिया जाएगा.
  • बिजनेस के लिए विशेष आर्थिक मदद के इंतजाम किए जाएंगे.