रियल एस्टेट कंपनियों के निकाय नारेडको ने केंद्र सरकार से आने वाले बजट में होम लोन पर ब्याज छूट की सीमा को बढ़ाने की मांग की है। उनकी मांग है कि मौजूदा 2 लाख रुपये की सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया जाए, जिससे घर खरीदने वाले लोगों को बड़ी राहत मिल सकेगी। इस कदम से रियल एस्टेट सेक्टर को भी प्रोत्साहन मिलेगा और अधिक लोग घर खरीदने के लिए प्रेरित होंगे।

ब्याज छूट बढ़ाने की मांग और इसका संभावित असर

नारेडको ने गुरुवार को सरकार से आगामी बजट में आवास ऋण पर दी जाने वाली ब्याज कटौती को मौजूदा 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने का आग्रह किया है। यह बदलाव आम आदमी के लिए घर खरीदना आसान बना सकता है, क्योंकि इससे उन्हें टैक्स में ज्यादा छूट मिलेगी। रियल एस्टेट सेक्टर का मानना है कि इस बढ़ोतरी से घर खरीदारों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और बाजार में मांग में वृद्धि होगी।

रियल एस्टेट को उद्योग का दर्जा देने की पैरवी

इस संस्था ने रियल एस्टेट क्षेत्र को ‘उद्योग’ का दर्जा देने की भी मांग रखी है। नारेडको का तर्क है कि रियल एस्टेट भारतीय अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसे उद्योग का दर्जा मिलने से इस क्षेत्र को ऋण तक बेहतर पहुंच, निवेश और सरकारी नीतियों में सहायता मिल सकेगी। इससे क्षेत्र का व्यवस्थित विकास होगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

किफायती आवास की नई परिभाषा

नारेडको ने किफायती आवास की परिभाषा में बदलाव की भी वकालत की है। उनकी मांग है कि अब 90 लाख रुपये तक की कीमत वाले घरों को किफायती आवास माना जाए, जबकि मौजूदा सीमा 45 लाख रुपये है। इस बदलाव से महानगरों और बड़े शहरों में भी अधिक घरों को किफायती आवास की श्रेणी में लाया जा सकेगा, जिससे अधिक से अधिक लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल पाएगा।

सभी के लिए आवास सुनिश्चित करने पर जोर

नारेडको के चेयरमैन निरंजन हीरानंदानी ने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र सरकार ने रियल एस्टेट क्षेत्र को समर्थन देने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन किफायती आवास के लिए और अधिक काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि “हमें सभी के लिए आवास सुनिश्चित करना होगा। आवास को अन्य बुनियादी ढांचा क्षेत्रों के समान महत्व मिलना चाहिए।”

GulfHindi Desk

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