मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में चल रहे तनाव और संघर्ष का असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। मई 2026 में वैश्विक स्तर पर बिजनेस ग्रोथ की रफ्तार पूरी तरह से थम गई है। S&P Global के ताजा सर्वे के मुताबिक, इस तनाव की वजह से दुनिया की बड़ी-बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिसमें यूरोप की हालत सबसे ज्यादा खराब है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी चेतावनी दी है कि विकासशील देशों को इस जंग की सबसे बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है।

दुनिया के बड़े देशों पर क्या पड़ा असर?

S&P Global Market Intelligence के मुख्य व्यवसाय अर्थशास्त्री क्रिस विलियमसन ने बताया कि मिडिल ईस्ट की जंग का आर्थिक नुकसान अब साफ दिखने लगा है। मई के आंकड़ों के अनुसार, महंगाई और बढ़ती लागत की चिंताओं के कारण मांग कमजोर हुई है और कंपनियों ने नौकरियों में कटौती की है। इस आर्थिक मंदी का असर अलग-अलग देशों पर इस तरह पड़ा है:

  • यूरोप (यूके और यूरोज़ोन): मंदी का सबसे ज्यादा असर यहीं देखा गया, जहां कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं गिरावट की तरफ बढ़ रही हैं।
  • अमेरिका: अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में थोड़ी तेजी आई है लेकिन सर्विस सेक्टर कमजोर बना हुआ है। बढ़ती लागत की वजह से नौकरियों पर खतरा बना हुआ है।
  • भारत: भारत की प्राइवेट सेक्टर एक्टिविटी में भी थोड़ी गिरावट आई है। HSBC Flash India Composite PMI अप्रैल के 58.2 से गिरकर मई में 58.1 पर आ गया है।
  • जापान: जापान का प्राइवेट सेक्टर भी सुस्ती का शिकार हुआ है और इसकी ग्रोथ पांच महीने के निचले स्तर पर आ गई है।

इस पूरे बदलाव और अलग-अलग क्षेत्रों पर पड़े असर को नीचे दी गई तालिका से समझा जा सकता है:

देश / क्षेत्र आर्थिक संकेतक और असर (मई 2026)
वैश्विक जीडीपी (UN अनुमान) 2026 के लिए 2.5% अनुमानित (0.2% की कमी)
अमेरिका (S&P US PMI) 51.7 पर स्थिर, सर्विस सेक्टर में कमजोरी
भारत (HSBC Flash India PMI) 58.1 पर आया (पिछला 58.2)
ग्लोबल कॉर्पोरेट नुकसान 25 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान

महंगाई और कंपनियों के नुकसान पर बड़ी रिपोर्ट

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पहले ही चेतावनी दी थी कि पश्चिम एशिया में अस्थिरता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने 19 मई 2026 को जारी अपनी चेतावनी में कहा कि इस तनाव के चलते वैश्विक जीडीपी ग्रोथ का अनुमान घटाकर 2.5% कर दिया गया है।

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मिडिल ईस्ट संकट के कारण दुनिया भर की कंपनियों को 25 अरब डॉलर से ज्यादा का भारी-भरकम नुकसान हुआ है। इसमें सबसे ज्यादा मार विमानन कंपनियों (Airlines) पर पड़ी है, जिन्हें महंगे हवाई ईंधन (Jet Fuel) की वजह से करीब 15 अरब डॉलर का घाटा उठाना पड़ा है। महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच अमेरिका में फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर भी बाजार में काफी चिंता बनी हुई है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

S&P Global Flash PMI के अनुसार वैश्विक व्यापार की क्या स्थिति है?

S&P Global के अनुसार, मिडिल ईस्ट संकट के कारण मई 2026 में ग्लोबल बिजनेस ग्रोथ थम गई है। कच्चे माल की बढ़ती लागत और महंगाई के डर से कंपनियों ने नौकरियां घटाई हैं और व्यापारिक गतिविधियां कमजोर हुई हैं।

मिडिल ईस्ट संकट से वैश्विक कंपनियों को कितना नुकसान हुआ है?

इस संघर्ष की वजह से दुनिया भर की कंपनियों को 25 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा है, जिसमें जेट ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण अकेले एयरलाइंस को 15 अरब डॉलर का घाटा हुआ है।

संयुक्त राष्ट्र (UN) ने वैश्विक जीडीपी को लेकर क्या चेतावनी दी है?

संयुक्त राष्ट्र ने 19 मई 2026 को चेतावनी दी कि विकासशील देश इस संकट का सबसे बड़ा शिकार बन रहे हैं और साल 2026 के लिए वैश्विक जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को 0.2% घटाकर 2.5% कर दिया गया है।