इसराइल के वेस्ट बैंक में नई बस्तियां बसाने के फैसले पर दुनिया भर में मचा बवाल, देशों ने दी चेतावनी

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसराइल के एक बड़े फैसले के खिलाफ भारी गुस्सा और विरोध देखने को मिल रहा है। इसराइल के हाउसिंग मंत्रालय ने 18 अगस्त 2026 को कब्जाए गए वेस्ट बैंक के ई1 क्षेत्र में 1,234 घरों के निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं। इस पूरी परियोजना का मुख्य लक्ष्य इस इलाके में 3,400 से 3,401 नए आवास तैयार करना है, जिसे वित्त मंत्री बेजेलेल स्मोत्रिच की तरफ से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है।
यह नया प्रोजेक्ट यरुशलम और माले अदुमिम बस्ती के बीच स्थित है। विशेषज्ञों और वैश्विक नेताओं का मानना है कि इस निर्माण कार्य से वेस्ट बैंक का इलाका दो हिस्सों में बंट जाएगा, जिससे वहां की भौगोलिक स्थिति पूरी तरह बदल जाएगी। इन निर्माण कार्यों के लिए बोलियां जमा करने की आखिरी तारीख 19 अक्टूबर 2026 तय की गई है। हैरानी की बात यह है कि यह तारीख इसराइल में होने वाले आम चुनावों से ठीक एक हफ्ते पहले है, जो 27 अक्टूबर 2026 को होने वाले हैं।
कई देशों ने जताई कड़ी आपत्ति
यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, नॉर्वे और कनाडा की सरकारों ने एक साझा बयान जारी किया है। इन सभी देशों ने इस इसराइली फैसले को पूरी तरह से 'अस्वीकार्य' बताया है और इस योजना को तुरंत वापस लेने की सख्त मांग की है। इन देशों ने साफ चेतावनी दी है कि जो भी कंपनियां इन टेंडरों में हिस्सा लेंगी, उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के गंभीर कानूनी और सामाजिक परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।
ब्रिटेन के विदेश सचिव डेविड लैमी ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसराइल के चार्ज डी अफेयर्स को तलब किया है। साथ ही यह भी घोषणा की है कि ब्रिटिश सरकार बस्ती विस्तार से जुड़े लोगों पर लक्षित प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए इसराइल के विदेश मंत्री गिडियन सार ने ब्रिटेन के इस रुख को 'संरक्षकता' यानी पैट्रोनाइजिंग करार दिया है। उन्होंने कहा कि इसराइल अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और वह ऐसे दबावों में नहीं झुकेगा।
फिलिस्तीन और संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी
फिलिस्तीनी राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता नबील अबू रुदैनेह ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि यह प्रोजेक्ट पूरे क्षेत्र को नियंत्रण से बाहर धकेल सकता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से केवल जुबानी निंदा करने के बजाय ठोस कदम उठाने की अपील की है। इसके अलावा, अरब संसद के अध्यक्ष मोहम्मद अल-यमाही ने इस कदम को फिलिस्तीनी क्षेत्रीय एकता को कमजोर करने वाला एक खतरनाक escalation बताया है।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने भी इस घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इसराइल से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का पालन करने की पुरानी मांग को फिर से दोहराया। उन्होंने 19 जुलाई 2024 के उस अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के सलाहकार फैसले का भी जिक्र किया, जिसमें गाजा पट्टी और पूर्वी यरुशलम सहित वेस्ट बैंक पर इसराइली कब्जे को गैरकानूनी घोषित किया गया था।
जमीनी हालात और हिंसा
इसराइल की बस्तियों के विरोध में काम करने वाली संस्था 'पीस नाउ' ने यह जानकारी दी है कि यह परियोजना ऐसे समय में आगे बढ़ाई जा रही है जब वेस्ट बैंक के हालात बेहद अस्थिर हैं। इस क्षेत्र में लगातार बढ़ती हुई हिंसक घटनाएं और फिलिस्तीनी अर्थव्यवस्था पर लगाए जा रहे कड़े प्रतिबंध आम जनता के जीवन को और ज्यादा मुश्किल बना रहे हैं। जमीनी स्तर पर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और आम लोग इस स्थिति से बहुत ज्यादा परेशान हैं।