क्रूड ऑयल के दामों में बड़ी गिरावट, मध्य पूर्व में तनाव कम होने से तेल हुआ सस्ता.

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल यानी Crude Oil की कीमतों में बुधवार, 26 अगस्त 2026 को भारी बिकवाली के चलते करीब 2% तक की गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड ऑयल $1.78 यानी 2% गिरकर $86.80 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इसके साथ ही यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड भी $1.49 यानी 1.8% फिसलकर $80.87 प्रति बैरल पर पहुंच गया। इस गिरावट ने पिछले कई दिनों से चल रहे महंगे तेल के दौर पर थोड़ा ब्रेक लगा दिया है, जिससे आम आदमी और बाजार दोनों ने राहत की सांस ली है।
बाजार में क्यों आई अचानक गिरावट
मंगलवार को भी बाजार में भारी बिकवाली देखी गई थी, जिसमें दोनों प्रमुख क्रूड ऑयल कॉन्ट्रैक्ट्स में 3% से ज्यादा की गिरावट आई थी। इसके अलावा अक्टूबर WTI क्रूड ऑयल भी दिन के कारोबार में 3.00% नीचे आया था और WTI काSettlement $80.94 USD/Bbl पर हुआ था, जो पिछले सत्र से 1.72% कम था। बाजार के एक्सपर्ट्स का मानना है कि कीमतों में आई इस कमजोरी की मुख्य वजह अमेरिका से सामने आई वे रिपोर्ट्स हैं जिनमें कहा गया था कि अमेरिका मध्य पूर्व स्थित अपने दूतावासों में वापस अपने राजनयिकों को भेजेगा। इस कदम से क्षेत्र में ईरान के साथ युद्ध के हालात और तनाव बढ़ने की आशंका काफी हद तक कम हो गई है। बाजार को यह संदेश मिला है कि ट्रंप प्रशासन इस क्षेत्र में किसी भी तरह के बड़े सैन्य टकराव की उम्मीद नहीं कर रहा है, जिससे निवेशकों का डर कम हुआ और तेल के दाम नीचे आ गए।
खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और भारत आने-जाने वाले लोगों के लिए भी कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव काफी मायने रखता है। तेल सस्ता होने से वैश्विक स्तर पर महंगाई को काबू करने में मदद मिलती है, जिसका असर ट्रांसपोर्ट, खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के सामानों पर भी पड़ता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह बदलाव सिर्फ राजनीतिक हालातों और कूटनीतिक फैसलों पर निर्भर कर रहा है, इसलिए आने वाले दिनों में कीमतों में फिर से बदलाव देखने को मिल सकता है।