पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण दुनिया भर में ईंधन और बिजली का संकट पैदा हो गया है। 28 फरवरी 2026 को ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत के बाद शुरू हुए इस संघर्ष ने ग्लोबल सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है। श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देश अब फ्यूल राशनिंग और वर्क फ्रॉम होम जैसे कड़े कदम उठा रहे हैं। भारत सरकार ने भी हालात पर नजर रखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी है और जमाखोरी के खिलाफ सख्त निर्देश दिए हैं।

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विभिन्न देशों में लागू किए गए आपातकालीन नियम

ऊर्जा संकट को देखते हुए कई सरकारों ने अपने नागरिकों के लिए नए नियम जारी किए हैं ताकि सीमित संसाधनों का सही इस्तेमाल हो सके। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य जरूरी सेवाओं के लिए ईंधन बचाना है।

देश प्रमुख कदम और नियम
श्रीलंका कारों के लिए हफ्ते में 25 लीटर पेट्रोल और स्कूलों में छुट्टी घोषित।
बांग्लादेश 5 घंटे की बिजली कटौती और गारमेंट सेक्टर को प्राथमिकता।
पाकिस्तान 4 दिन का वर्किंग वीक और 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम लागू।
म्यांमार हर बुधवार को रिमोट वर्किंग और गाड़ियों के लिए ऑड-ईवन नियम।
कंबोडिया सरकारी दफ्तरों में AC का तापमान 25 डिग्री सेल्सियस तय।
भारत LPG सप्लाई स्थिर रखने का भरोसा और जमाखोरी पर छापेमारी।

एक्सपर्ट्स और IEA की क्या है राय?

International Energy Agency (IEA) के प्रमुख फातिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि जंग की वजह से पश्चिम एशिया में 40 से ज्यादा ऊर्जा संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है। बिरोल के मुताबिक यह संकट 1970 के दशक के तेल संकट और 2022 के गैस संकट से भी बड़ा हो सकता है। बाजार से अब तक लगभग 1.1 करोड़ बैरल तेल कम हो चुका है।

भारतीय विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने अपनी कूटनीति और रूस जैसे देशों से तेल खरीदकर स्थिति को फिलहाल संभाल लिया है। हालांकि, कोटक महिंद्रा सिक्योरिटीज के विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तनाव और बढ़ता है तो सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है क्योंकि दुनिया का करीब 20 प्रतिशत गैस फ्लो इसी क्षेत्र से प्रभावित हो रहा है। भारत के पेट्रोलियम मंत्रालय ने लोगों से LPG का उपयोग समझदारी से करने की अपील की है।