International Energy Agency (IEA) ने अपनी नई रिपोर्ट में एक बड़ी चेतावनी दी है. एजेंसी के मुताबिक, साल 2026 तक दुनिया भर में नेचुरल गैस की मांग में 0.5% की गिरावट आ सकती है. पिछले सात सालों में यह तीसरी बार है जब गैस की मांग में ऐसी कमी देखी जा रही है.

गैस की मांग घटने का मुख्य कारण मिडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष है. इस तनाव की वजह से गैस की सप्लाई कम हुई है और कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे बिजली और औद्योगिक सेक्टर में इसका इस्तेमाल घटा है. खासकर एशिया के देशों में गैस महंगी होने के कारण अब बिजली उत्पादन के लिए कोयले का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.

सप्लाई और मार्केट की स्थिति

दुनिया की करीब 20% LNG सप्लाई Strait of Hormuz के रास्ते होती है. हालांकि जून के बीच में अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक समझौते के बाद जहाजों की आवाजाही थोड़ी बढ़ी है, लेकिन यह अब भी युद्ध से पहले के स्तर से कम है. IEA का कहना है कि अगर यह रास्ता चौथी तिमाही तक पूरी तरह नहीं खुला, तो 2012 के बाद पहली बार ग्लोबल LNG सप्लाई में सालाना गिरावट देखी जा सकती है.

कतर के इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान

रिपोर्ट में बताया गया है कि कतर के Ras Laffan liquefaction साइट जैसे महत्वपूर्ण गैस इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा है. इस वजह से गैस उत्पादन की क्षमता बढ़ाने के काम में देरी होगी, जिसका असर 2027 तक मार्केट पर पड़ सकता है और सप्लाई की कमी बनी रह सकती है.

मार्केट के मुख्य आंकड़ों पर एक नज़र:

विवरण जानकारी
गैस मांग में संभावित गिरावट 0.5% (साल 2026 तक)
Strait of Hormuz की हिस्सेदारी कुल LNG सप्लाई का 20%
सप्लाई गिरावट का जोखिम 2012 के बाद पहली बार संभव
प्रभावित क्षेत्र एशिया और यूरोप
विकल्प कोयले का बढ़ता उपयोग
क्षतिग्रस्त प्लांट कतर का Ras Laffan साइट
मार्केट तनाव की अवधि 2027 तक संभावित

हालांकि, नॉर्थ अमेरिका, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया से उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है, जिससे 2026 की कुल ग्लोबल सप्लाई 2025 के मुकाबले लगभग स्थिर रह सकती है.

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.