दुनियाभर में कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। अमेरिका के नेतृत्व में लगी नौसैनिक नाकेबंदी के कारण ईरान का तेल निर्यात लगभग ठप हो गया है और उसके पास तेल स्टोर करने की जगह नहीं बची है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने चेतावनी दी है कि आने वाले जुलाई और अगस्त के महीनों में तेल बाजार बेहद संवेदनशील स्थिति में पहुंच जाएगा, जिससे दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
ईरान के पास तेल रखने की जगह खत्म, समुद्र में खड़े हैं जहाज
ताजा सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि ईरान के मुख्य निर्यात टर्मिनल खार्ग द्वीप के पास करीब 26 तेल टैंकर समुद्र में खड़े हैं। इन टैंकरों का इस्तेमाल तैरते हुए स्टोरेज के रूप में किया जा रहा है क्योंकि जमीन पर बने टैंक पूरी तरह भर चुके हैं। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के अनुसार, इस नाकेबंदी से ईरान को हर दिन लगभग 170 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है। मजबूरी में ईरान को अपने तेल कुओं से उत्पादन कम करना पड़ रहा है ताकि कुओं को स्थायी नुकसान न पहुंचे।
बंद पड़े तेल के कुओं को दोबारा शुरू करना क्यों है बड़ी चुनौती?
आमतौर पर लोग सोचते हैं कि युद्ध या नाकेबंदी खत्म होने के बाद तेल की सप्लाई तुरंत शुरू हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं होता है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि तेल के कुओं को लंबे समय तक बंद रखने से उनके अंदर का दबाव कम हो जाता है और पानी भरने का खतरा बढ़ जाता है। इससे कुएं हमेशा के लिए खराब हो सकते हैं। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के प्रमुख फातिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि मिडिल ईस्ट के तबाह हो चुके एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह ठीक होने में दो साल तक का समय लग सकता है।
बाजार से रोजाना 14 मिलियन बैरल तेल गायब, जून में लगेगा झटका
आईईए के अनुसार, इस समय वैश्विक बाजार से रोजाना 14 मिलियन बैरल तेल गायब है। पूर्व सीआईए अधिकारी विलियम उषर ने भविष्यवाणी की है कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के कारण जून में वैश्विक अर्थव्यवस्था को तेल की कीमतों का बड़ा झटका लग सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जल्दबाजी में उत्पादन शुरू करने से तेल क्षेत्रों को हमेशा के लिए नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए इस संकट का असर लंबे समय तक रहने वाला है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान में कच्चे तेल का उत्पादन क्यों कम किया जा रहा है?
अमेरिका की नाकेबंदी के कारण ईरान का तेल बिक नहीं रहा है और उसके सारे स्टोरेज टैंक और समुद्री जहाज तेल से पूरी तरह भर चुके हैं। आगे स्टोर करने की जगह न होने के कारण उसे उत्पादन रोकना पड़ा है।
तेल के कुओं को बंद करने से क्या नुकसान होता है?
लंबे समय तक बंद रहने से कुओं के अंदर दबाव कम हो जाता है और उनमें पानी घुस जाता है। इससे कुओं की क्षमता कम हो जाती है और उन्हें दोबारा चालू करने में बहुत खर्च और समय लगता है।
क्या इस संकट से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे?
हाँ, इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने चेतावनी दी है कि बाजार में रोजाना 14 मिलियन बैरल तेल की कमी के कारण जुलाई और अगस्त में तेल बाजार गंभीर संकट में आ सकता है, जिससे कीमतें बढ़ सकती हैं।
