यूनान ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए अपनी वायु रक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है.

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव का असर अब यूरोप तक पहुंच गया है। यूनान यानी Greece ने अपनी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ग्रीस ने 23 अगस्त 2026 को अपने एक पैट्रीट मिसाइल बैटरी को कार्पाथोस द्वीप से हटाकर क्रीट द्वीप पर मौजूद सूदा नवल बेस पर शिफ्ट कर दिया है। इस बदलाव का मुख्य मकसद देश की हवाई सुरक्षा को और ज्यादा पुख्ता करना है, क्योंकि पिछले कुछ समय से अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर संभावित हमलों को लेकर लगातार धमकियां मिल रही हैं।
ईरान की तरफ से मिली चेतावनी
यह पूरा मामला तब गरमाया जब ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों की तरफ से अमेरिका को लेकर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। ईरान के सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ के चीफ Major General Ali Abdollahi ने 23 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक चेतावनी जारी की थी। उन्होंने साफ कहा था कि अमेरिकी सेना की मदद करने वाले हर देश को तेहरान की नजरों में सह-अपराधी माना जाएगा। इसके अलावा, ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने भी बयान दिया था कि जो देश अपनी तकदीर विदेशियों के हाथ में सौंप देते हैं, उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है। खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के पास दो हजार किलोमीटर से ज्यादा रेंज वाली बैलिस्टिक मिसाइलें मौजूद हैं, जो दक्षिण-पूर्वी यूरोप तक आसानी से मार कर सकती हैं.
ग्रीस सरकार और सेना का अगला कदम
इन तमाम धमकियों के बाद ग्रीस के रक्षा मंत्रालय और सेना को पूरी तरह से हाई अलर्ट पर रख दिया गया है। एथेंस प्रशासन लगातार अमेरिका और इस्राइल के संपर्क में है ताकि ग्रीस और साइप्रस में मौजूद सैन्य ठिकानों और जरूरी बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। आपको बता दें कि साइप्रस में ग्रीस के F-16 fighter jets पहले से ही तैनात हैं। इसके अलावा, ग्रीस इस बात पर भी विचार कर रहा है कि अगर बुल्गारिया की तरफ से कोई औपचारिक अनुरोध आता है, तो उसे हवाई और मिसाइल रक्षा सहायता मुहैया कराई जाए।
सऊदी अरब में तैनात बैटरी पर भी विचार
घरेलू मोर्चे पर तैनाती के अलावा ग्रीस के अधिकारी एक दूसरे पैट्रीट मिसाइल सिस्टम पर भी मंथन कर रहे हैं। सितंबर 2021 से सऊदी अरब में ग्रीस की एक और पैट्रीट बैटरी तैनात है। अब ग्रीस की नेशनल डिफेंस काउंसिल इस बात पर विचार कर रही है कि इस तैनाती को आगे बढ़ाया जाए या फिर इसे वापस बुला लिया जाए। दूसरी तरफ, नाटो संगठन, जो सूदा बेस की रणनीतिक सुविधाओं का इस्तेमाल करता है, ने कहा है कि वह किसी भी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और उसकी रक्षा प्रणाली बेहद मजबूत है।