ईरान और उसके पड़ोसी खाड़ी देशों के बीच जारी संघर्ष का सबसे बुरा असर वहां काम करने वाले दक्षिण एशियाई प्रवासियों पर पड़ रहा है। 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस तनाव के कारण अब तक कई भारतीय, पाकिस्तानी और बांग्लादेशी नागरिकों की जान जा चुकी है। काम रुकने और आर्थिक मंदी के डर से लाखों प्रवासी अपनी नौकरी और भविष्य को लेकर चिंता में हैं। भारत समेत कई देशों ने अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए गहरी चिंता जताई है और संयम बरतने की अपील की है।

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ईरान के हमलों में किन देशों के कितने लोग प्रभावित हुए?

खाड़ी देशों में चल रहे हमलों के बीच जारी आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा नुकसान दक्षिण एशियाई देशों के नागरिकों को हुआ है। इन प्रवासियों की स्थिति को इस प्रकार समझा जा सकता है:

देश प्रभावित नागरिकों की संख्या और स्थिति
भारत ओमान में 3 और सऊदी अरब में 1 नागरिक की मौत हुई है।
पाकिस्तान UAE में हुए हमलों में 3 पाकिस्तानी नागरिकों की जान गई है।
नेपाल अबू धाबी एयरपोर्ट पर हुए हमले में 1 नेपाली नागरिक की मौत हुई है।
बांग्लादेश सऊदी अरब और UAE में बांग्लादेशी नागरिकों की मौत की पुष्टि हुई है।

अब तक कम से कम 12 दक्षिण एशियाई कामगारों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। ये सभी लोग एयरपोर्ट, कंस्ट्रक्शन साइट और शिपिंग जैसे जरूरी क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे थे।

प्रवासियों की कमाई और नौकरी पर क्या असर पड़ेगा?

इस युद्ध के कारण खाड़ी देशों से अपने देश पैसे भेजने वाले प्रवासियों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबा चलता है, तो खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था में 15 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। इससे प्रवासियों द्वारा घर भेजे जाने वाले पैसे में 30 प्रतिशत तक की बड़ी कमी होने की आशंका है।

  • तेल रिफाइनरी, कंस्ट्रक्शन और शिपिंग के काम रुकने से नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है।
  • ईंधन की कीमतों में उछाल आने से भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देशों में महंगाई बढ़ सकती है।
  • भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि खाड़ी में रह रहे 1 करोड़ भारतीय नागरिकों की सुरक्षा उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
  • कामगारों के परिवारों की आर्थिक स्थिति भी इस तनाव की वजह से अधर में लटक गई है।

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख ने भी चेतावनी दी है कि आम नागरिकों और बुनियादी ढांचे पर हो रहे ये हमले तुरंत रुकने चाहिए। कई प्रवासियों का कहना है कि वे अपने देश वापस जाना चाहते हैं लेकिन वहां रोजगार की कमी उन्हें वापस रुकने पर मजबूर कर रही है।