खाड़ी देशों में काम करने गए मजदूरों के लिए यह बहुत मुश्किल समय है। ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों ने वहां रहने वाले प्रवासियों की जान जोखिम में डाल दी है। कई लोग जो अपने परिवार का पेट पालने और बेहतर भविष्य के लिए गए थे, अब कफ़न में लिपटे हुए अपने घर लौट रहे हैं।

युद्ध की शुरुआत और हमलों का असर

28 फरवरी 2026 से अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू हुआ। इस जंग के दौरान ईरान ने कुवैत, सऊदी अरब, UAE, बहरीन, ओमान और कतर जैसे खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया। इन हमलों में हवाईअड्डे, बिजली-पानी के प्लांट और तेल सुविधाओं जैसे बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। चूंकि प्रवासी मजदूर इन्हीं जगहों पर काम करते हैं, इसलिए वे सबसे ज्यादा जोखिम में आ गए।

मजदूरों की मौत और हताहतों के आँकड़े

न्यूयॉर्क टाइम्स ने आधिकारिक स्रोतों के हवाले से बताया कि अमेरिकी-इज़राइली हमलों के बाद खाड़ी देशों में कम से कम 12 नागरिक मारे गए। इन मौतों में सिर्फ एक व्यक्ति स्थानीय नागरिक था, जबकि बाकी सभी विदेशी प्रवासी मजदूर थे। रिपोर्ट के अनुसार, अकेले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में 4 लोगों की जान गई और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि खाड़ी देशों की तेल सुविधाओं और अन्य प्लांट में काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों को इस युद्ध की सबसे भारी कीमत चुकानी पड़ी। हालांकि मारे गए लोगों की राष्ट्रीयता का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं है, लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि मरने वाले लगभग सभी प्रवासी ही थे।