खाड़ी देशों में जारी तनाव और Strait of Hormuz के बंद होने का असर अब दक्षिण एशिया के किसानों पर दिखने लगा है। बुवाई का सीजन नजदीक आते ही खाद की कमी और बढ़ती कीमतों ने भारत, पाकिस्तान और नेपाल जैसे देशों की चिंता बढ़ा दी है। संयुक्त राष्ट्र और स्थानीय सरकारें इस संकट से निपटने के लिए रास्ते तलाश रही हैं ताकि आने वाले समय में खाद की कमी से फसल उत्पादन पर बुरा असर न पड़े। Strait of Hormuz के बंद होने से खाद की सप्लाई प्रभावित हुई है जिससे कीमतों में 30 से 40 प्रतिशत तक का उछाल आया है।

खाद संकट के पीछे के मुख्य कारण क्या हैं?

  • सप्लाई चेन में रुकावट: Strait of Hormuz मार्च 2026 की शुरुआत से बंद है, जहाँ से दुनिया का एक तिहाई खाद व्यापार होता है।
  • उत्पादन में कमी: Qatar Energy (QAFCO) जैसी बड़ी कंपनियों ने गैस की कमी की वजह से अपने यूरिया प्लांट बंद कर दिए हैं।
  • महंगाई की मार: खाद की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है जिससे माल ढुलाई और बीमा का खर्च भी बढ़ गया है।
  • निर्यात पर रोक: चीन ने अपनी घरेलू सुरक्षा को देखते हुए यूरिया के निर्यात पर पाबंदी लगा दी है।

भारत और अन्य देशों की मौजूदा स्थिति क्या है?

देश/संस्था मौजूदा स्थिति और उठाए गए कदम
भारत सरकार ने खाद कारखानों को गैस सप्लाई में प्राथमिकता दी है और नए आयात विकल्पों पर काम हो रहा है।
नेपाल फिलहाल 1.37 लाख टन खाद का स्टॉक मौजूद है लेकिन भारत के साथ हुआ पुराना समझौता 31 मार्च को खत्म हो गया है।
संयुक्त राष्ट्र UN ओमान के सलालाह पोर्ट के जरिए एक सुरक्षित कॉरिडोर बनाने की योजना पर काम कर रहा है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में जानकारी दी है कि गर्मी की बुवाई के लिए पर्याप्त खाद की व्यवस्था की गई है। सरकार ने खाद बनाने वाली कंपनियों को ‘Priority Sector-2’ में रखा है ताकि उन्हें कम से कम 70 प्रतिशत गैस की सप्लाई मिल सके। जानकारों का कहना है कि यदि यह संकट लंबा खिंचता है तो इससे पैदावार कम हो सकती है और आने वाले समय में खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं। नेपाल के कृषि मंत्रालय ने भी चेतावनी दी है कि वैश्विक कीमतों में बढ़ोत्तरी से खाद की सप्लाई में देरी हो सकती है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.