जुलाई का महीना आने वाला है और गल्फ देशों में भीषण गर्मी का अलर्ट जारी किया गया है। तापमान बहुत ज़्यादा बढ़ने वाला है, जिससे आम लोगों और बाहर काम करने वाले प्रवासियों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। प्रशासन ने लोगों को सावधानी बरतने और सरकारी नियमों का पालन करने की सलाह दी है ताकि स्वास्थ्य जोखिमों को कम किया जा सके।

तापमान का हाल और चेतावनी

आने वाले दिनों में कई देशों में पारा चढ़ने वाला है। UAE में तापमान 43°C से 47°C के बीच रहने का अनुमान है। सऊदी अरब के पूर्वी और मध्य इलाकों में तापमान 44°C से ऊपर जा सकता है। कुवैत में 27 जून तक तापमान 48°C तक पहुँच सकता है, जबकि कतर में धूल भरी आँधी और तेज़ हवाओं की चेतावनी दी गई है। मिस्र में भी 9 जुलाई तक भीषण गर्मी का दौर चलेगा, जहाँ तेज़ धूप और उमस लोगों को परेशान करेगी।

कामकाजी नियमों में बदलाव

गल्फ देशों में गर्मियों के दौरान दोपहर के समय बाहर काम करने पर पाबंदी है। यह नियम जून से अगस्त या सितंबर तक लागू रहता है ताकि मज़दूर सीधी धूप से बच सकें। UAE सरकार ने डिलीवरी राइडर्स के लिए 10 हज़ार से ज़्यादा एयर-कंडीशंड रेस्ट स्टेशन बनाए हैं। कतर में नियम है कि पीक आवर्स के दौरान सामान पहुँचाने का काम कारों के ज़रिए ही किया जाए।

आम जनता के लिए ज़रूरी सावधानियां

अधिकारियों और विशेषज्ञों ने गर्मी से बचने के लिए कुछ ज़रूरी बातें बताई हैं:

  • दोपहर की तेज़ धूप में बाहर निकलने से बचें।
  • प्यास न लगने पर भी नियमित रूप से पानी पीते रहें।
  • छायादार जगहों और एयर-कंडीशंड कमरों में समय बिताएं।
  • ढीले, हल्के रंग के और सूती कपड़े पहनें।
  • बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों का खास ख्याल रखें। बच्चों या पालतू जानवरों को गाड़ी में अकेला न छोड़ें।
  • हीट स्ट्रोक (लू लगना) के लक्षणों को पहचानें और आपात स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

भविष्य की चिंता और नए प्रयास

वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले समय में तापमान और बढ़ सकता है। इस समस्या से निपटने के लिए सऊदी अरब में “ग्रीन रियाद” प्रोजेक्ट के तहत 75 लाख पेड़ लगाए जा रहे हैं, जिससे तापमान में 1 से 2 डिग्री की कमी आ सकती है। वहीं UAE में AI तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो 96% सटीकता के साथ हीटवेव की भविष्यवाणी कर सकती है।

दूसरी ओर, ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) ने चिंता जताई है कि सिर्फ समय की पाबंदी प्रवासियों को बचाने के लिए काफी नहीं है। उन्होंने मांग की है कि काम के घंटे तय करने के लिए केवल समय नहीं, बल्कि तापमान और उमस के वैज्ञानिक पैमाने का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.