खाड़ी देशों और जॉर्डन ने मिलकर इराक सरकार से एक अहम मांग की है। 25 मार्च 2026 को जारी एक साझा बयान में कहा गया है कि इराक अपनी ज़मीन का इस्तेमाल पड़ोसी देशों पर हमले के लिए न होने दे। इन देशों ने साफ किया है कि इराक में सक्रिय सशस्त्र गुटों और मिलिशिया द्वारा किए जा रहे हमले क्षेत्र की शांति के लिए बड़ा खतरा हैं। यह बयान सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर, बहरीन और जॉर्डन की ओर से संयुक्त रूप से आया है।

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साझा बयान में किन मुख्य बातों को उठाया गया है?

  • इन देशों ने इराक से अपनी सीमाओं के भीतर सक्रिय मिलिशिया और सशस्त्र समूहों को तुरंत रोकने के लिए कहा है।
  • बयान में स्पष्ट किया गया है कि ये हमले अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सीधा उल्लंघन हैं।
  • सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 (2026) का ज़िक्र करते हुए ईरान समर्थित गुटों की गतिविधियों को बंद करने की मांग की गई है।
  • खाड़ी देशों और जॉर्डन ने अपनी सुरक्षा के लिए आत्मरक्षा के अधिकार की बात भी दोहराई है।
  • इन देशों ने इराक सरकार से भाईचारे के संबंधों को बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की है।

आम जनता और क्षेत्र की सुरक्षा पर इसका क्या प्रभाव है?

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त Volker Türk ने भी इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि रिहायशी इलाकों और आम लोगों को निशाना बनाना युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकता है। इन हमलों की वजह से पूरे इलाके में तनाव बढ़ रहा है, जिसका असर वहां रहने वाले प्रवासियों और व्यापार पर भी पड़ता है। खाड़ी देशों ने साफ कर दिया है कि अगर ये हमले नहीं रुके, तो इससे क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ सकता है। इराक सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह अपनी ज़मीन का इस्तेमाल किसी भी पड़ोसी देश के खिलाफ होने से रोकेगी।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.