खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों और जॉर्डन ने गुरुवार, 23 जुलाई 2026 को एक संयुक्त बयान जारी किया है। इस बयान में यमन संकट के समाधान के लिए सऊदी अरब और ओमान द्वारा की जा रही कोशिशों की सराहना की गई है। खाड़ी देशों ने स्पष्ट किया है कि वे यमन में शांति बहाली के लिए किए जा रहे प्रयासों के साथ मजबूती से खड़े हैं।

ईरान की गतिविधियों पर कड़ी आपत्ति

बयान में ईरान और उसके सहयोगियों द्वारा किए जा रहे हमलों की कड़ी निंदा की गई है। खाड़ी देशों का कहना है कि 28 फरवरी 2026 से चल रही ये हरकतें अंतरराष्ट्रीय नियमों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प 2817 (2026) का उल्लंघन करती हैं। इन देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से ईरान के इन हमलों को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है।

अपनी सुरक्षा का सबको अधिकार

संयुक्त बयान में जोर देकर कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत हर देश को अपनी सुरक्षा का अधिकार है। साथ ही, इन देशों ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मंडेब में समुद्री आवाजाही की आजादी बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और जॉर्डन के विदेश मंत्री अयमन सफादी ने भी फोन पर बातचीत कर क्षेत्रीय तनाव कम करने के तरीकों पर चर्चा की है।

इसके अलावा, ओमान का विदेश मंत्रालय भी सऊदी अरब और यमन के विभिन्न पक्षों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि राजनीतिक प्रक्रिया को फिर से शुरू किया जा सके। खाड़ी देशों ने इराक के प्रधानमंत्री के उस फैसले का भी स्वागत किया है जिसके तहत 30 सितंबर 2026 तक हथियारों को केवल सरकारी नियंत्रण में रखने की योजना है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.