Gulf Nations Update: ईरान के साथ कूटनीति में नाकामी से भड़के खाड़ी देश, अमेरिका से बढ़ रही है नाराज़गी.

खाड़ी देशों में अमेरिकी प्रशासन की नीतियों को लेकर इन दिनों भारी गुस्सा देखने को मिल रहा है। Saudi Arabia, UAE, Qatar, Kuwait और Bahrain जैसे प्रमुख देशों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि अमेरिका ईरान के मुद्दे पर किसी ठोस कूटनीतिक समझौते तक नहीं पहुंच पा रहा है। इन देशों के अधिकारियों का मानना है कि अमेरिका की तरफ से जो कोशिशें होनी चाहिए थीं, उनमें साफ तौर पर कमी नजर आ रही है, जिसके चलते पूरे इलाके में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों की उपयोगिता पर उठ रहे सवाल
क्षेत्रीय अधिकारियों ने खुलकर यह कहना शुरू कर दिया है कि उनके देशों में जो बड़े अमेरिकी सैन्य ठिकाने बने हुए हैं, अब उनकी मौजूदगी का कोई खास फायदा नजर नहीं आ रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि इन देशों को डर है कि इस चल रहे तनाव की वजह से उनकी अपनी सुरक्षा और ऊर्जा की सप्लाई खतरे में पड़ सकती है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप ANI News की रिपोर्ट पढ़ सकते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि खाड़ी देश खुद को एक ऐसी लड़ाई में उलझा हुआ महसूस कर रहे हैं जिसका कोई सिरा नजर नहीं आता और अमेरिका का रुख भी काफी अनिश्चित बना हुआ है।
सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच नया समझौता
इस पूरे घटनाक्रम के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। हाल ही में Saudi Arabia, Turkey और Pakistan के बीच एक आपसी रक्षा समझौता हुआ है, जो इस बात का संकेत देता है कि खाड़ी देश अब सुरक्षा के लिए सिर्फ अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय अपने अन्य विकल्पों को भी मजबूत कर रहे हैं। इन देशों के नेताओं का मानना है कि मौजूदा अमेरिकी नेतृत्व के साथ तालमेल बिठाना मुश्किल हो रहा है और कूटनीति के मोर्चे पर कोई भी पक्की सफलता हाथ नहीं लग रही है।
व्हाइट हाउस का आधिकारिक बयान
इन तमाम रिपोर्ट्स और क्षेत्रीय नाराजगी के सामने आने के बाद White House ने स्थिति को संभालने की कोशिश की है। व्हाइट हाउस के एक आधिकारिक प्रवक्ता ने साफ तौर पर उन खबरों को खारिज कर दिया जिनमें यह कहा जा रहा था कि खाड़ी देशों के साथ अमेरिका के रिश्ते खराब हो रहे हैं। प्रवक्ता का कहना था कि राष्ट्रपति Trump के सभी खाड़ी सहयोगियों के साथ बेहद शानदार संबंध हैं और वे लगातार क्षेत्रीय नेताओं के संपर्क में बने हुए हैं। हालांकि इन आश्वासनों के बावजूद, ज़मीनी स्तर पर हालात सुधरते नजर नहीं आ रहे हैं और बातचीत में प्रगति न होने के कारण खाड़ी देशों के नेता अमेरिकी कोशिशों को लेकर लगातार संशय में बने हुए हैं।