सऊदी अरब और यूएई समेत खाड़ी देशों ने ईरान से की सुरक्षा और आर्थिक मामलों पर गुप्त बातचीत

Sushma Kumari23 August 20263 min read67 viewsWorld
सऊदी अरब और यूएई समेत खाड़ी देशों ने ईरान से की सुरक्षा और आर्थिक मामलों पर गुप्त बातचीत

खाड़ी देशों में क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कूटनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। Saudi Arabia, United Arab Emirates, Qatar, Kuwait और Bahrain जैसे देशों ने ईरान के साथ निजी स्तर पर लगभग रोजाना संपर्क साधना शुरू कर दिया है। इन पड़ोसी देशों का मुख्य उद्देश्य ईरान के साथ नए सुरक्षा और आर्थिक सहयोग समझौतों की संभावनाओं को तलाशना है। इस बात की जानकारी ईरान की संसद के अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने दी है। उनके अनुसार, क्षेत्र के ये देश अमेरिका की सुरक्षा गारंटियों की विश्वसनीयता को लेकर काफी चिंतित हैं। 22 अगस्त 2026 को दिए गए अपने बयान में उन्होंने बताया कि अमेरिका की नीतियों ने क्षेत्रीय हितों को ताक पर रखकर इस्राइल का पक्ष लिया है, जिससे उसके अपने सहयोगी देश खतरे में पड़ गए हैं।

अमेरिका की सैन्य कमी और पैट्रियट मिसाइलों का संकट

खाड़ी देशों द्वारा इस तरह के नए सुरक्षा समीकरण तलाशने के पीछे एक बड़ी वजह अमेरिकी सेना के पास जरूरी साजो-सामान की कमी होना भी है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना के पास पैट्रियट (Patriot) और थाड (THAAD) इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक काफी कम हो गया है। इस गंभीर संकट का खुलासा 19 अगस्त 2026 को प्रकाशित काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (Council on Foreign Relations) की एक रिपोर्ट में हुआ था। इस कमी के कारण खाड़ी देशों में स्थित वे अमेरिकी सैन्य अड्डे भी खतरे की चपेट में आ गए हैं, जहां अमेरिकी सैनिक तैनात रहते हैं। हथियारों के इस भारी भंडार की कमी ने ही कथित तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को पिछले महीने ईरान के खिलाफ एक बड़े सैन्य हमले की योजना को रद्द करने के लिए मजबूर किया था।

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जीसीसी के भीतर कूटनीतिक प्रयास और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति

दूसरी तरफ, खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के भीतर भी लगातार कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। 22 अगस्त 2026 को कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Sheikh Mohammed bin Abdulrahman Al Thani ने यूएई, सऊदी अरब, कुवैत, ओमान और बहरीन के अपने समकक्षों से फोन पर बातचीत की। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के ज्ञापन को लागू करने में आपसी तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया। वहीं दूसरी ओर, ईरानी विदेश मंत्री Araghchi ने 22 अगस्त को यह घोषणा की कि मौजूदा संघर्ष विराम के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) वाणिज्यिक जहाजों के आने-जाने के लिए पूरी तरह खुला रहेगा। हालांकि, यह मार्ग उन देशों के लिए बंद रहेगा जिन्हें ईरान के खिलाफ हालिया आक्रामकता में शामिल देशों का दुश्मन या सहयोगी माना गया है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और स्वतंत्र क्षेत्रीय व्यवस्था

इन तमाम घटनाओं से पहले क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर था, जिसका असर अब कूटनीति पर साफ दिखाई दे रहा है। 2 जुलाई 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) के एक आपातकालीन सत्र के दौरान कुवैत ने अपने क्षेत्र पर हुए शुरुआती ईरानी हमलों की कड़ी निंदा की थी। गालिबफ ने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा किसी बाहरी ताकत के भरोसे नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र व्यवस्था के आधार पर बनाई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान धमकियों के आगे झुककर बातचीत करने के बजाय रणक्षेत्र में अपने नए पत्ते खोलने के लिए पूरी तरह तैयार है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और आम नागरिकों के लिए यह स्थिति इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा के मोर्चे पर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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