Strait of Hormuz के बंद होने से पूरी दुनिया में तेल की किल्लत और तनाव बढ़ गया है। अब Goldman Sachs की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर यह रास्ता दोबारा खुलता है, तो खाड़ी देशों का तेल उत्पादन कुछ ही महीनों में वापस पटरी पर आ सकता है। हालांकि, पूरी तरह से पुरानी स्थिति में लौटने के लिए थोड़ा ज़्यादा समय लग सकता है और तनाव रहने पर जोखिम भी बढ़ेगा।
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तेल उत्पादन में कितनी कमी आई और रिकवरी का समय क्या है?
Goldman Sachs की रिसर्च के मुताबिक, अप्रैल के महीने में खाड़ी देशों का करीब 14.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन (bpd) तेल उत्पादन बंद था। यह कुल सप्लाई का लगभग 57% हिस्सा था। अच्छी बात यह है कि तेल के कुओं को कोई भौतिक नुकसान नहीं पहुँचा है, बल्कि यह बंद केवल सुरक्षा और स्टॉक मैनेजमेंट की वजह से हुआ है। ऐसे में रास्ता खुलते ही उत्पादन तेज़ी से बढ़ाया जा सकता है।
| विवरण | आंकड़ा/प्रभाव |
|---|---|
| अप्रैल में बंद उत्पादन | 14.5 मिलियन bpd |
| कुल सप्लाई में कमी | 57% |
| 3 महीने में संभावित रिकवरी | 70% |
| 6 महीने में संभावित रिकवरी | 88% |
| टैंकर क्षमता में कमी | 130 मिलियन बैरल |
| टैंकर क्षमता प्रतिशत गिरावट | 50% |
किन देशों को फायदा होगा और क्या हैं मुख्य रुकावटें?
सऊदी अरब और UAE के पास अतिरिक्त क्षमता है, इसलिए ये देश बहुत जल्दी तेल उत्पादन को बढ़ा पाएंगे। लेकिन ईरान और इराक के लिए यह काम मुश्किल होगा क्योंकि वहां बुनियादी ढांचे की दिक्कतें और प्रतिबंधों का असर है। इसके अलावा, तेल ले जाने वाले खाली टैंकरों की संख्या 50% तक कम हो गई है, जिससे एक्सपोर्ट फिर से शुरू करने की रफ़्तार धीमी हो सकती है। अगर कुओं को लंबे समय तक बंद रखा गया, तो उनके बहाव की दर कम हो सकती है जिससे मरम्मत का काम करना पड़ेगा।
तनाव कम करने के लिए अमेरिका ने क्या कदम उठाए?
क्षेत्र में चल रहे विवाद और तेल सप्लाई पर असर को देखते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के ज़रिए ईरान के विदेश मंत्री से बात करने के लिए दूत भेजे हैं। साथ ही, अमेरिका ने तेल और गैस की शिपमेंट को आसान बनाने के लिए Jones Act की छूट को 90 दिनों के लिए बढ़ा दिया है। जानकारों का कहना है कि Strait of Hormuz जितनी देर बंद रहेगा, तेल उत्पादन को वापस लाने में उतनी ही ज़्यादा देरी होगी।