Iran Threat: खाड़ी देशों में ईरान को लेकर बड़ा मतभेद, खतरा तो बड़ा है लेकिन निपटने का तरीका अलग-अलग

खाड़ी देशों के लिए ईरान एक बहुत बड़ा खतरा बन गया है। मिडिल ईस्ट काउंसिल फॉर ग्लोबल अफेयर्स की Sheikha Alanoud Hamad Al Thani ने बताया कि सभी GCC देश ईरान को एक बड़े खतरे के रूप में देखते हैं, लेकिन उसे रोकने के लिए सबकी सोच अलग है। इसी वजह से खाड़ी देश एक साथ मिलकर कोई एक रास्ता नहीं निकाल पा रहे हैं।

ईरान से निपटने के लिए कौन सा देश क्या सोचता है?

देश ईरान पर नजरिया उठाए गए कदम
Bahrain सीधा और लगातार खतरा 2021 के बाद से संबंध बहाल नहीं किए
Oman बातचीत और डिप्लोमेसी शांति और संवाद को प्राथमिकता दी
UAE सुरक्षा और व्यापार का तनाव दुबई में ইরानी संस्थाएं बंद कीं
Qatar नियंत्रण और मध्यस्थता क्षेत्रीय संघर्ष को रोकने पर जोर दिया

एक्सपर्ट्स और मीटिंग्स में क्या बातें हुईं?

Sheikha Alanoud Hamad Al Thani का कहना है कि GCC देश कभी भी ईरान के मुद्दे पर एक नहीं रहे। उन्होंने बताया कि भले ही सभी छह देशों पर ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमले हुए, फिर भी उनकी राय एक जैसी नहीं है। इसी बीच, फरवरी 2026 में दोहा में आयोजित 17वें अल जजीरा फोरम में ईरान के विदेश मंत्री सहित कई बड़े लोगों ने बातचीत के जरिए मसले हल करने पर चर्चा की। मई 2025 में भी एक कॉन्फ्रेंस हुई थी जिसमें विवादों को सुलझाने की कोशिश की गई थी।

क्षेत्र में शांति और प्रवासियों के लिए क्या मायने है?

खाड़ी देशों ने अपनी जमीन या आसमान का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए करने से मना किया है। यह बात उन लोगों के लिए राहत वाली है जो वहां नौकरी करते हैं या रहते हैं, क्योंकि इससे बड़े युद्ध का खतरा कम रहता है। हालांकि, सुरक्षा बढ़ाने के लिए GCC देश अब एयर डिफेंस सिस्टम को एक साथ जोड़ने पर विचार कर रहे हैं ताकि भविष्य में होने वाले हमलों को रोका जा सके।