Gulf देशों और अमेरिका ने मिलकर ईरान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) में एक बड़ा प्रस्ताव रखा है. इस प्रस्ताव में ईरान को चेतावनी दी गई है कि अगर उसने जहाजों पर हमले और अवैध टैक्स लेना बंद नहीं किया, तो उस पर कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. यह मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गरमा गया है क्योंकि ईरान ने हाल ही में जहाजों पर टैक्स वसूलने के लिए एक नई एजेंसी बनाई है.
UN के प्रस्ताव में ईरान से क्या मांग की गई है?
- हमले रोकें: ईरान को हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) में जहाजों पर हमले तुरंत बंद करने होंगे.
- टैक्स बंद करें: जहाजों से लिए जा रहे अवैध टोल और टैक्स को रोकना होगा.
- माइन की जानकारी: समुद्र में बिछाई गई सभी माइन (mines) की जगह बतानी होगी ताकि उन्हें हटाया जा सके और रास्ता साफ़ हो.
- मदद का रास्ता: मानवीय सहायता, खाद और अन्य ज़रूरी सामान पहुँचाने के लिए एक कॉरिडोर बनाने में मदद करनी होगी.
ईरान की कौन सी हरकतों ने दुनिया को परेशान किया?
ईरान ने 7 मई 2026 को एक नई सरकारी एजेंसी बनाई है जो हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले जहाजों पर टैक्स लगाएगी. विशेषज्ञों का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है. इससे पहले 4 मई को ईरान ने UAE पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे, जिससे फ़ुज़ैरह पेट्रोलियम इंडस्ट्री ज़ोन में आग लग गई थी. इन घटनाओं के बाद बहरीन ने UN से इस मामले पर चर्चा करने की मांग की थी.
क्या अमेरिका और Gulf देश ईरान पर सैन्य कार्रवाई करेंगे?
शुरुआत में इस प्रस्ताव में सैन्य कार्रवाई की बात थी, लेकिन अब इसे बदल दिया गया है. अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio और राजदूत Mike Waltz ने कहा है कि अब मुख्य ध्यान प्रतिबंधों (sanctions) पर है. ऐसा इसलिए किया गया है ताकि चीन और रूस इस प्रस्ताव को वीटो (veto) न कर सकें, क्योंकि पिछले महीने एक इसी तरह के प्रस्ताव को इन दोनों देशों ने रोक दिया था.
Frequently Asked Questions (FAQs)
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है?
यह रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए सबसे अहम है. यहाँ किसी भी तरह की रुकावट से पूरी दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ता है.
UAE पर हुए हमले का क्या असर हुआ?
4 मई को हुए हमलों में मिसाइल और ड्रोन का इस्तेमाल हुआ था, जिससे UAE के फ़ुज़ैरह इलाके में आग लग गई थी. इसी वजह से Gulf देश अब ईरान के खिलाफ कड़े कदम उठा रहे हैं.