खाड़ी देशों को इस बात की गहरी चिंता है कि अमेरिका और ईरान के बीच होने वाला नया समझौता ईरान को समुद्री रास्तों पर ज़्यादा ताकत दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और कुवैत जैसे देश इस बात से डरे हुए हैं कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे रणनीतिक ऊर्जा मार्ग पर ईरान का दबदबा बढ़ जाएगा। यह रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए बहुत ज़रूरी है और इस पर किसी भी तरह का नियंत्रण वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

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क्यों डरे हुए हैं खाड़ी देश और क्या है हॉर्मुज का मुद्दा?

हॉर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग पाँचवा हिस्सा तेल और गैस गुज़रता है। ईरान ने दो हफ्ते के संघर्षविराम के दौरान इस रास्ते को खोलने की बात तो कही है, लेकिन उसकी शर्त है कि यहाँ से गुज़रने वाले जहाज़ों को ईरानी सेना के साथ तालमेल बिठाना होगा। खाड़ी देशों को लगता है कि ईरान इस रास्ते को एक राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करना चाहता है।

  • UAE ने मांग की है कि हॉर्मुज के रास्ते पर बिना किसी रोक-टोक के पहुँच सुनिश्चित होनी चाहिए।
  • सऊदी अरब के विशेषज्ञों का कहना है कि इस रास्ते की सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
  • अमेरिका ने साफ़ कर दिया है कि वह ईरान को इस रास्ते पर टैक्स या टोल वसूलने की अनुमति नहीं देगा।

समझौते और हमलों की ताज़ा स्थिति क्या है?

7 और 8 अप्रैल 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच एक छोटे संघर्षविराम पर सहमति बनी थी। हालांकि, इस शांति के वादे के बावजूद कुवैत, सऊदी अरब और बहरीन ने 8 अप्रैल को नए मिसाइल और ड्रोन हमलों की सूचना दी है। इन हमलों ने खाड़ी देशों के भरोसे को और कम कर दिया है। अब 10 अप्रैल को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में शांति वार्ता शुरू होने वाली है, जिस पर पूरी दुनिया की नज़रें टिकी हुई हैं।

देश/संस्था मुख्य स्थिति और चिंता
UAE और सऊदी ईरान के मिसाइल और ड्रोन क्षमता पर लगाम लगाने की मांग।
कुवैत हाल ही में हुए ईरानी हमलों को ‘तीखा’ और खतरनाक बताया।
IMO (UN) समुद्री जहाज़ों की सुरक्षा के लिए नया सिस्टम बनाने पर काम जारी।
ईरान हॉर्मुज रास्ते पर अपना नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश में।
अमेरिका संघर्षविराम को बहुत नाज़ुक मान रहा है।