खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने गंभीर रूप ले लिया है। दोनों देशों के बीच चल रहे हमले अब तेज हो गए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध का खतरा मंडरा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिका ने लगातार आठवीं रात ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) पर हवाई हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन से हमला किया है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर बड़ा असर
ईरान के हमलों का असर अब आम नागरिकों और बुनियादी ढांचे पर भी दिखने लगा है। कुवैत में स्थित एक डीसेलिनेशन प्लांट पर लगातार दूसरे दिन हमला हुआ, जिससे वहां आग लग गई। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है। वहीं, जॉर्डन और बहरीन ने भी अपनी ओर आ रहे ईरानी मिसाइलों और ड्रोन्स को हवा में ही मार गिराया है।
प्रवासियों और व्यापार के लिए चिंता
इस टकराव की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही ठप हो गई है, जिससे व्यापार पर बुरा असर पड़ रहा है। अमेरिकी नौसेना ने क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। ईरान की तरफ से दी गई चेतावनी में कहा गया है कि अगर अमेरिका पीछे नहीं हटा, तो यूएई के पोर्ट्स और कुवैत के पावर प्लांट उनके निशाने पर हो सकते हैं। इस स्थिति के चलते अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए दुनिया भर में यात्रा को लेकर अलर्ट जारी किया है। अब तक की हिंसा में 16 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और 430 से अधिक घायल हुए हैं, जबकि ईरान का दावा है कि उनके यहां हुए हमलों में 50 लोग मारे गए और 517 लोग घायल हुए हैं।
