खाड़ी देशों में चल रहे तनाव ने दुनिया के ताकतवर G7 देशों की नींद उड़ा दी है। IFRI के डायरेक्टर ने चेतावनी दी है कि इस अशांति से बड़ी आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। इसका सीधा असर दुनिया भर में तेल की सप्लाई और सामान पहुंचाने वाले रास्तों यानी सप्लाई चेन पर पड़ेगा।
IFRI डायरेक्टर ने G7 देशों को लेकर क्या चेतावनी दी?
फ्रांसीसी थिंक टैंक IFRI के डायरेक्टर ने एक इंटरव्यू में बताया कि गल्फ रीजन में मची हलचल से G7 देशों के लिए खतरा बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि इससे एनर्जी सिक्योरिटी यानी ऊर्जा सुरक्षा को नुकसान पहुंच सकता है। अगर तेल और गैस की सप्लाई में कोई बड़ी दिक्कत आई, तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है।
ईरान और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में क्या स्थिति है?
मार्च 2026 में ईरान ने बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, UAE, जॉर्डन और इराक के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले किए थे। इसके जवाब में अमेरिका और इसराइल ने भी ईरान पर हमले किए। हालांकि 15 अप्रैल 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम हुआ, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता अभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है और शिपिंग कंपनियां इसे हाई रिस्क जोन मान रही हैं।
आम लोगों और प्रवासियों पर इसका क्या असर होगा?
सप्लाई चेन में रुकावट आने से सामान पहुंचने में देरी होगी और मालभाड़ा महंगा हो जाएगा। इससे बाजार में महंगाई बढ़ सकती है जिससे आम आदमी की जेब पर बोझ पड़ेगा। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारतीयों के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि आर्थिक अस्थिरता से बिजनेस और नौकरी के माहौल पर असर पड़ सकता है।
