Strait of Hormuz में जारी युद्ध का असर अब पूरे खाड़ी देशों पर काफी गहराई से दिखने लगा है। अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष को अब 13 दिन हो गए हैं। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने Strait of Hormuz को बंद रखने का आदेश दिया है। इस युद्ध की वजह से बड़े पैमाने पर तबाही हो रही है और खाड़ी देश एक बहुत बड़े वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं।

खाड़ी देशों में हमलों और नुकसान की ताज़ा स्थिति

पिछले 24 घंटों में युद्ध का दायरा इराक तक बढ़ गया है। कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कई ड्रोन हमले हुए हैं जिससे बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है।

UAE में दुबई के आसमान पर दागी गई मिसाइलों और ड्रोन्स को एयर डिफेंस ने हवा में ही रोक दिया है। एक रिपोर्ट के अनुसार UAE ने युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 262 में से 241 बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट किया है।

ओमान के Port of Salalah में तेल भंडारण सुविधाओं में ड्रोन हमलों से भयानक आग लग गई है। वहीं इराक के बसरा ऑयल टर्मिनल के पास दो टैंकरों पर हमला हुआ है जिससे वहां तेल का काम पूरी तरह रुक गया है।

थाईलैंड के एक जहाज Mayuree Naree पर भी हमला हुआ है। युद्ध शुरू होने से लेकर अब तक कुल 19 कमर्शियल जहाजों को भारी नुकसान पहुंच चुका है।

तेल की कीमतों और शिपिंग पर क्या असर पड़ा

युद्ध के कारण कच्चे तेल (Brent crude) की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं। हाल ही में यह कीमत 120 डॉलर तक पहुंच गई थी और ईरान की तरफ से इसे 200 डॉलर तक जाने की चेतावनी दी गई है।

अमेरिका को इस युद्ध की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। पेंटागन की रिपोर्ट के मुताबिक पहले ही हफ्ते में मिसाइलों को रोकने और सैन्य अभियानों पर 11.3 बिलियन डॉलर खर्च हो गए हैं।

समंदर के रास्ते व्यापार करने वाली Maersk और MSC जैसी बड़ी कंपनियों ने Strait of Hormuz से अपने जहाज भेजना बंद कर दिया है। नॉर्वे की सरकार ने भी अपने जहाजों को इस रास्ते पर जाने से पूरी तरह रोक दिया है और बीमा कंपनियों ने भी अपना कवर वापस ले लिया है।

हालात को काबू में रखने के लिए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने अमेरिका के इमरजेंसी तेल भंडार से 172 मिलियन बैरल तेल निकालने की मंजूरी दी है।

प्रवासियों और आम लोगों के लिए क्या हैं चिंताएं

खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों प्रवासियों के लिए यह युद्ध काफी चिंता लेकर आया है। कुवैत और दुबई जैसे शहरों में हो रहे हमलों से लोगों में सुरक्षा का डर बना हुआ है।

अगर समंदर का रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है तो कई जरूरी सामानों की सप्लाई रुक सकती है। इससे बाजारों में रोजमर्रा की चीजें महंगी होने की आशंका है।

तेल महंगा होने से फ्लाइट्स के टिकट के दाम भी बढ़ सकते हैं जिसका सीधा असर भारत और अन्य देशों से आने-जाने वाले प्रवासियों की जेब पर पड़ेगा।

सभी Gulf देशों की सरकारें लगातार स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही हैं ताकि आम लोगों को कम से कम परेशानी हो। सभी प्रवासियों को स्थानीय प्रशासन के दिशानिर्देशों का पालन करने की सलाह दी जाती है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.