सऊदी अरब में हज 2026 की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और दुनिया भर से तीर्थयात्री पहुंचना शुरू हो गए हैं। ईरान और भारत से हाजियों के जत्थे सऊदी अरब पहुंच चुके हैं। इस बार सऊदी सरकार ने मक्का में प्रवेश को लेकर बहुत कड़े नियम बनाए हैं, जिसका पालन करना हर यात्री के लिए जरूरी है।
ईरानी और भारतीय हाजियों के पहुंचने की क्या स्थिति है?
ईरानी हाजियों का पहला जत्था शनिवार, 25 अप्रैल 2026 को मदीना के प्रिंस मोहम्मद बिन अब्दुलअज़ीज़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचा। दूसरा जत्था मंगलवार, 28 अप्रैल को पहुंचने वाला है। ईरान के राजदूत अलीरेज़ा इनायती ने सऊदी अधिकारियों का शुक्रिया अदा किया और कहा कि सऊदी अरब हाजियों के आराम के लिए बेहतरीन सेवाएं दे रहा है।
वहीं भारत की बात करें तो पहला जत्था 18 अप्रैल 2026 को मक्का के लिए रवाना हुआ। इस साल लगभग 1,75,025 भारतीय तीर्थयात्री हज यात्रा करेंगे। सऊदी अरब में भारतीय राजदूत सुहेल खान ने 26 अप्रैल को मक्का का दौरा किया और यात्रियों के लिए की गई व्यवस्थाओं को देखा।
मक्का में प्रवेश के लिए क्या नए नियम लागू हुए हैं?
सऊदी अरब ने इस बार सुरक्षा और भीड़ को कंट्रोल करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। मुख्य नियम इस प्रकार हैं:
- परमिट अनिवार्य: 13 अप्रैल 2026 से मक्का में केवल वही लोग जा सकते हैं जिनके पास वैध हज परमिट है।
- वीजा पर रोक: उमरा वीजा को अस्थायी तौर पर बंद कर दिया गया है।
- अन्य वीजा मान्य नहीं: टूरिस्ट वीजा या किसी अन्य वीजा पर आने वाले लोग मक्का में प्रवेश नहीं कर पाएंगे।
- डिजिटल वेरिफिकेशन: अब नुसुक (Nusuk) प्लेटफॉर्म के जरिए यात्रियों की जानकारी और परमिट चेक किए जा रहे हैं।
अधिकारियों ने साफ कहा है कि नियम तोड़ने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा और उन्हें देश से बाहर (डिपोर्ट) भी किया जा सकता है।
भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए कौन सी खास सुविधाएं हैं?
दिल्ली हज कमेटी की चेयरपर्सन कौसर जहां के मुताबिक, भारतीय यात्रियों की सुविधा के लिए कई बदलाव किए गए हैं। अब हर तीर्थयात्री के लिए बीमा कवरेज बढ़ाकर करीब 6.25 लाख रुपये कर दिया गया है। साथ ही, मक्का और मदीना के बीच चलने वाली हाई-स्पीड ट्रेन का फायदा लगभग 60,000 भारतीय यात्रियों को मिलेगा, जिससे उनका सफर आसान और तेज होगा।