देश के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC Bank के भीतर 45 करोड़ रुपये का एक बड़ा वित्तीय मामला सामने आया है। बैंक पर आरोप है कि उसने सामान्य ग्राहकों को नजरअंदाज कर वीआईपी ग्राहकों को अनुचित लाभ पहुंचाया। RBI के नियमों के उल्लंघन और इस संदिग्ध लेनदेन के खुलासे ने बैंकिंग क्षेत्र में खलबली मचा दी है।
अनियमित लेनदेन का विवरण
जांच में पता चला कि जहां सामान्य ग्राहकों और छोटे खाताधारकों को बचत पर केवल 3.5 प्रतिशत ब्याज दिया जा रहा था, वहीं वीआईपी ग्राहकों को 6.01 प्रतिशत तक का बड़ा ब्याज देने का वादा किया गया। यह मामला तब गंभीर हो गया जब महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) के 25,000 करोड़ रुपये के बड़े डिपॉजिट को पाने के लिए बैंक के अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखा।
जांच और इस्तीफे की स्थिति
बैंक की आंतरिक जांच में यह भी सामने आया कि जिन ‘रोड सेफ्टी अभियानों’ के नाम पर पैसे निकाले गए, उनके पास कोई वैध काम का सबूत नहीं था। एक ही फोटो का इस्तेमाल करके 9 करोड़ रुपये के अलग-अलग बिल पास कराए गए। इस घटना के बाद बैंक के बोर्ड ने शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की है, जिनमें शामिल हैं:
- Shashidhar Jagadishan, MD & CEO
- Srinivasan Vaidyanathan, CFO
- Arvind Bora, ग्रुप हेड, रिटेल एसेट्स
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक के चेयरमैन Atanu Chakraborty ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि बैंक के भीतर जो चल रहा था, वह उनके नैतिक मूल्यों के खिलाफ था।
