प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हीरा ग्रुप घोटाले की चल रही जांच में हस्तक्षेप करने और खुद को सरकारी सलाहकार बताकर अधिकारियों पर दबाव बनाने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। यह मामला भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के हजारों निवेशकों से जुड़ा है, जिनका पैसा इस पोंजी स्कीम में फंसा हुआ है। जांच एजेंसी के हैदराबाद जोनल कार्यालय ने 10 जनवरी को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत कल्याण बनर्जी नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।

सालाना 36 प्रतिशत से अधिक रिटर्न का लालच देकर हजारों निवेशकों से ठगी करने वाली हीरा ग्रुप की मुख्य आरोपी से जुड़े हैं तार

यह गिरफ्तारी हीरा ग्रुप और उसकी संस्थापक नोहेरा शेख के खिलाफ लंबे समय से चल रही जांच से संबंधित है। नोहेरा शेख पर आरोप है कि उन्होंने निवेशकों को सालाना 36 प्रतिशत से अधिक रिटर्न देने का वादा करके जनता से लगभग 5,600 करोड़ रुपये (2.45 बिलियन दिरहम से अधिक) की उगाही की और बाद में भुगतान करने में विफल रहीं।

जांच एजेंसी के अनुसार, जब मामले में कुर्क की गई संपत्तियों की नीलामी को रोकने के तमाम कानूनी प्रयास विफल हो गए, तो मुख्य आरोपी शेख ने कल्याण बनर्जी को इस काम के लिए नियुक्त किया था। भारतीय अधिकारी कुर्क की गई संपत्तियों को नीलाम करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि उससे प्राप्त राशि को धोखाधड़ी के शिकार पीड़ितों को लौटाया जा सके।

आरोपी ने खुद को बताया था बड़े नौकरशाहों और राजनेताओं का करीबी, नीलामी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए अधिकारियों को दी थी धमकी

एजेंसी ने खुलासा किया है कि कल्याण बनर्जी ने खुद को वरिष्ठ नौकरशाहों और राजनेताओं का करीबी बताकर ईडी अधिकारियों से संपर्क किया। उसका उद्देश्य नीलामी प्रक्रिया में हेरफेर करना या उसे लंबा खींचना था। जब अधिकारियों ने उसे उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के लिए कहा, तो उसने कथित तौर पर अधिकारियों को धमकाना शुरू कर दिया और कार्यवाही को रोकने के लिए उन पर दबाव बनाया। 10 जनवरी को सिकंदराबाद में उसके ठिकानों पर की गई छापेमारी में मोबाइल फोन जब्त किए गए, जिनमें नोहेरा शेख और उनके सहयोगियों के साथ हुई व्हाट्सएप चैट मिली है। जांचकर्ताओं का आरोप है कि इन संदेशों से जांच और न्यायिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने की कोशिशों का पता चलता है।

व्हाट्सएप चैट से हुआ मिलीभगत का खुलासा, आरोपी ने कबूला कि वह नोहेरा शेख के इशारे पर गैरकानूनी गतिविधियों को दे रहा था अंजाम

पीएमएलए के तहत दर्ज किए गए अपने बयान में, बनर्जी ने फर्जीवाड़ा करने की बात स्वीकार की है। उसने माना कि वह शेख और उनके सहयोगियों के निर्देश पर काम कर रहा था और अपराध से अर्जित आय से जुड़ी गतिविधियों में जानबूझकर सहायता कर रहा था। उसे 11 जनवरी को नामपल्ली की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 23 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। ईडी पहले ही हीरा ग्रुप मामले में करोड़ों रुपये की संपत्ति कुर्क कर चुकी है और हैदराबाद की विशेष अदालत में अभियोजन की शिकायतें दर्ज करा चुकी है। एजेंसी ने पीड़ितों को मुआवजा दिलाने के लिए संपत्तियों की नीलामी की अनुमति हेतु सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया है।

तेलंगाना हाई कोर्ट ने नीलामी रोकने की याचिका खारिज करते हुए लगाया था 5 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना, पीड़ितों को राहत मिलने की जगी उम्मीद

गौरतलब है कि पिछले महीने तेलंगाना उच्च न्यायालय ने नीलामी को रोकने के लिए नोहेरा शेख द्वारा दायर एक याचिका को खारिज कर दिया था। अदालत ने उन पर 5 करोड़ रुपये का अनुकरणीय जुर्माना भी लगाया था और निर्देश दिया था कि यह राशि प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा की जाए। हीरा ग्रुप के पतन का असर भारत के साथ-साथ मध्य पूर्व, विशेषकर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में रहने वाले निवेशकों पर गहरा पड़ा है, जहां बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीयों ने ग्रुप की योजनाओं में अपनी गाढ़ी कमाई निवेश की थी।

GulfHindi Desk

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