मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य तनाव के बीच हीलियम गैस की वैश्विक सप्लाई पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष की वजह से Strait of Hormuz से होने वाला व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मार्च 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस रास्ते के प्रभावी रूप से बंद होने से हीलियम की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे मेडिकल सेक्टर और चिप बनाने वाली कंपनियों की चिंता बढ़ गई है। कतर जैसे बड़े हीलियम उत्पादक देशों से सप्लाई रुकने का सीधा असर वैश्विक बाज़ारों पर दिखने लगा है।

हीलियम की कमी से उद्योगों और आम जनता पर क्या असर होगा?

  • मेडिकल सेक्टर पर दबाव: वैश्विक हीलियम का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा अस्पतालों में MRI मशीनों को ठंडा रखने के लिए इस्तेमाल होता है, जिसकी कमी से इलाज की लागत बढ़ सकती है।
  • चिप मैन्युफैक्चरिंग: सेमीकंडक्टर और AI टेक्नोलॉजी में इस्तेमाल होने वाली चिप्स बनाने के लिए हीलियम अनिवार्य है, सप्लाई रुकने से इलेक्ट्रॉनिक्स सामान महंगे हो सकते हैं।
  • कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी: संकट शुरू होने के बाद से हीलियम की कीमतों में 50 से 70 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
  • सप्लाई चेन में रुकावट: Strait of Hormuz से होने वाले ट्रैफिक में 95 प्रतिशत तक की गिरावट आई है, जिससे सामानों की डिलीवरी में देरी हो रही है।

सप्लाई और उत्पादन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े

ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध के कारण दुनिया की एक-तिहाई हीलियम सप्लाई खतरे में पड़ गई है। कतर के Ras Laffan इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स के बंद होने से बाजार में हीलियम की भारी कमी हो गई है। इसकी मौजूदा स्थिति को नीचे दी गई तालिका से समझा जा सकता है:

विवरण वर्तमान स्थिति और प्रभाव
मासिक उत्पादन में कमी लगभग 52 लाख क्यूबिक मीटर हीलियम बाजार से बाहर हो गई है।
कतर एनर्जी की घोषणा कंपनी ने LNG और हीलियम शिपमेंट पर फोर्स मेज्योर (Force Majeure) लागू कर दिया है।
ट्रांजिट में कमी Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट आई है।
रिकवरी का अनुमान सप्लाई सामान्य होने में हफ्तों से लेकर महीनों तक का समय लग सकता है।
वैश्विक हिस्सेदारी Strait of Hormuz दुनिया की कुल हीलियम सप्लाई के 25 प्रतिशत से अधिक हिस्से का रास्ता है।

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के प्रमुख ने चेतावनी दी है कि हीलियम जैसे महत्वपूर्ण गैसों की सप्लाई रुकने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा। जर्मनी के रक्षा मंत्री ने भी इस स्थिति को आर्थिक तबाही करार दिया है। फिलहाल ईरान ने जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही के लिए कड़े नियम लागू कर दिए हैं, जिससे अन्य देशों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.