लेबनान में तनाव के बीच Hezbollah के चीफ Naim Qassem ने इसराइल से अपनी सेना को पूरी तरह हटाने की मांग की है. उन्होंने दावा किया कि इसराइल और अमेरिका ने मिलकर जो योजना बनाई थी, वह अब नाकाम हो चुकी है. उन्होंने इस बदलाव को रेजिस्टेंस मूवमेंट की बड़ी जीत बताया है.

Hezbollah चीफ Naim Qassem ने कई बार कहा है कि इसराइल को लेबनान की ज़मीन से एक इंच भी जगह नहीं छोड़नी चाहिए और एक तय समय के भीतर अपनी सेना वापस लेनी चाहिए. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब इसराइल के पास पीछे हटने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा है.

इन 5 शर्तों पर अड़ा Hezbollah

  • हमलों को पूरी तरह बंद किया जाए.
  • इसराइली सेना लेबनान से पूरी तरह बाहर निकले.
  • लेबनान की अपनी सेना को तैनात किया जाए.
  • कैदियों को वापस लाया जाए.
  • स्थानीय लोगों को उनके घरों में लौटने दिया जाए और वहां पुनर्निर्माण का काम हो.

26 जून 2026 को एक संबोधन में Qassem ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए समझौते से इसराइल और अमेरिका की रणनीतिक हार हुई है. उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि वे इसराइल के साथ किसी भी तरह के संबंध सामान्य नहीं करेंगे और न ही किसी समझौते को स्वीकार करेंगे.

लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun ने दक्षिण लेबनान पर इसराइल के कब्जे का विरोध किया है और विदेशी हस्तक्षेप को गलत बताया है. वहीं, लेबनान के स्पीकर Nabih Berri ने युद्धविराम को मजबूत करने और इसराइली सेना की पूरी वापसी पर ज़ोर दिया है.

दूसरी तरफ, इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने सेना हटाने से इनकार किया है. उनका कहना है कि जब तक सुरक्षा का खतरा है, उनकी सेना वहां रहेगी. इसराइल चाहता है कि बॉर्डर पर एक बफर ज़ोन बनाया जाए और लेबनान की सेना की निगरानी की जाए.

इस बीच, लेबनान में हिंसा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. 23 जून और 26 जून को इसराइली हमलों में कुछ लोगों की मौत हुई है, जिसे Hezbollah ने युद्धविराम का खुला उल्लंघन बताया है.