लेबनान के हिज़्बुल्लाह प्रमुख शेख नईम कासिम ने ईरान को धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान के समर्थन की वजह से इसराइल को अपनी सैन्य कार्रवाई रोकनी पड़ी। यह सब ईरान और अमेरिका के बीच हुए एक बड़े समझौते के बाद हुआ है।

ईरान और अमेरिका के बीच हुआ समझौता

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 जून 2026 की सुबह ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) पर डिजिटल हस्ताक्षर किए। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय युद्ध को खत्म करना था। इस पूरी राजनयिक प्रक्रिया में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई।

ईरान के प्रति आभार

शेख नईम कासिम ने ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबाफ को एक संदेश भेजा। उन्होंने कहा कि ईरान के मजबूत रुख और प्रभावी समर्थन ने लेबनान और वहां के लोगों की मदद की। इसी समर्थन के कारण इसराइल को लेबनान सहित सभी मोर्चों पर अपनी सैन्य कार्रवाई तुरंत और स्थायी रूप से बंद करनी पड़ी।

बड़ी जीत और लेबनान का भविष्य

कासिम ने ईरान और वाशिंगटन के बीच हुए इस समझौते को ईरान की एक ‘बड़ी जीत’ बताया। उन्होंने इसे लेबनान के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ कहा। उन्होंने लेबनान से अपील की कि इस मौके का फायदा उठाकर इसराइल को लेबनानी जमीन से पूरी तरह बाहर निकाला जाए।

बातचीत पर हिज़्बुल्लाह का रुख

हिज़्बुल्लाह प्रमुख ने स्पष्ट किया कि लेबनान और इसराइल के बीच कोई भी बातचीत सिर्फ ‘आपसी सुरक्षा’ तक सीमित होनी चाहिए। उन्होंने हथियारों को छोड़ने के किसी भी प्रस्ताव को खारिज कर दिया और इसे इसराइल की चाल बताया। उन्होंने लेबनानी अधिकारियों को इसराइल के साथ सीधी बातचीत न करने की सलाह दी।

लेबनान के राष्ट्रपति का बयान

वहीं लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने अपनी अलग राय रखी। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन में इसराइल के साथ होने वाली उनकी बातचीत इस क्षेत्रीय समझौते से स्वतंत्र है। उन्होंने साफ किया कि लेबनान के आंतरिक मामलों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा, हालांकि उन्होंने ईरान सहित अन्य देशों से मिलने वाली सहायता का स्वागत किया।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.