हिज़्बुल्लाह ने उत्तरी Israel के खिलाफ अपनी जंग में एक नया और खतरनाक हथियार उतारा है. अब वे फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिन्हें रोकना मौजूदा सुरक्षा प्रणालियों के लिए बहुत मुश्किल हो गया है. ये छोटे ड्रोन सीधे एक पतले तार से जुड़े होते हैं, जिसकी वजह से इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग इन पर काम नहीं करती.
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फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन क्या हैं और ये कैसे काम करते हैं?
ये ड्रोन आम ड्रोनों की तरह वायरलेस सिग्नल पर नहीं चलते. इनके साथ एक बहुत ही पतला फाइबर केबल जुड़ा होता है, जो धागे जैसा होता है. आमतौर पर एयर डिफेंस सिस्टम इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के जरिए ड्रोन को रोक देते हैं या उन्हें गिरा देते हैं, लेकिन इन फाइबर-ऑप्टिक ड्रोनों पर जैमिंग का कोई असर नहीं होता. सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि ये कम ऊंचाई पर उड़ते हैं, इसलिए इन्हें पकड़ना और ट्रैक करना बहुत कठिन होता है.
Israel के लिए क्यों बनी ये बड़ी चुनौती और क्या हुआ नुकसान?
हिज़्बुल्लाह ने 14 अप्रैल 2026 के आसपास इन उन्नत FPV ड्रोनों का इस्तेमाल शुरू किया. चैनल 14 के मुताबिक, एक ड्रोन किरयत शमोना शहर की ओर भेजा गया था. 29 अप्रैल 2026 को हुए हमलों में कम से कम 38 Israel सैनिक घायल हुए. Israel के अखबार हारेत्ज़ और वल्लाह वेबसाइट ने बताया कि ये ड्रोन Israel की इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा को आसानी से बाईपास कर रहे हैं, जिससे सेना के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है.
यूक्रेन युद्ध और संघर्ष विराम पर असर
यह तकनीक पहली बार यूक्रेन युद्ध में देखी गई थी, जहाँ रूस और यूक्रेन दोनों ने इसका इस्तेमाल किया. यूक्रेन के कमांडर-इन-चीफ ओलेक्जेंडर सिर्स्की ने दिसंबर 2024 में ऐसे कामिकाज़े ड्रोनों के इस्तेमाल की बात कही थी. इस नए हमले के बाद Israel और हिज़्बुल्लाह के बीच संघर्ष विराम की उम्मीदें भी कम हुई हैं. बाजार के अनुमानों के मुताबिक, 30 जून 2026 तक युद्ध रुकने की संभावना 100% से घटकर 85% रह गई है.
Frequently Asked Questions (FAQs)
फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन को जैम करना मुश्किल क्यों है?
क्योंकि ये ड्रोन वायरलेस सिग्नल के बजाय एक फिजिकल फाइबर केबल से ऑपरेटर से जुड़े होते हैं, जिससे इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग या जीपीएस हस्तक्षेप उन पर बेअसर हो जाता है.
इन ड्रोनों से Israel को क्या नुकसान हुआ?
29 अप्रैल 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, इन ड्रोनों के हमलों में कम से कम 38 Israel सैनिक घायल हुए हैं.