लेबनान के हिज़्बुल्ला संगठन ने हथियारों को छोड़ने से साफ़ मना कर दिया है। संगठन के डिप्टी चीफ Naim Qassem ने कहा कि वे किसी भी हाल में अपने हथियार नहीं डालेंगे। उन्होंने इसराइल को ऐसी स्थिति में बताया जहाँ से अब उसके पास कोई रास्ता नहीं बचा है।

हथियार छोड़ने और बातचीत पर क्या कहा Naim Qassem ने?

IRNA न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक Naim Qassem ने कहा कि अमेरिका लेबनान पर दबाव बना रहा है कि हिज़्बुल्ला अपने हथियार छोड़ दे। लेकिन उन्होंने साफ़ कर दिया कि वे ऐसा नहीं करेंगे। उन्होंने इसराइल के साथ सीधी बातचीत करने को एक बड़ा गुनाह बताया और कहा कि इससे लेबनान में अस्थिरता पैदा होगी। उन्होंने यह भी कहा कि दुश्मन की धमकियों के बावजूद हिज़्बुल्ला की हार नहीं होगी और वे अपना बचाव जारी रखेंगे।

इसराइल के साथ बातचीत के लिए क्या शर्तें रखी गईं?

हिज़्बुल्ला ने बातचीत के लिए कुछ ज़रूरी शर्तें रखी हैं, जिनके बिना कोई चर्चा नहीं होगी:

  • जमीन, समंदर और आसमान से हमलों को तुरंत रोकना होगा।
  • इसराइल को कब्जे वाले इलाकों से पूरी तरह बाहर निकलना होगा।
  • कैदियों को रिहा करना होगा।
  • लोगों को वापस उनके गाँवों और कस्बों में जाने देना होगा।
  • तबाही के बाद पुनर्निर्माण का काम करना होगा।

यह बयान उस समय आया है जब लेबनान की सेना लिटानी नदी के दक्षिण में हिज़्बुल्ला को निशस्त्र करने की कोशिश कर रही थी। Naim Qassem का कहना है कि जब तक इसराइल नवंबर 2024 के ceasefire समझौते की शर्तों को पूरा नहीं करता, तब तक यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी।