Hezbollah ने इसराइल और लेबनान की बातचीत को बताया सरेंडर, कहा हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं

लेबनान और इसराइल के बीच शांति के लिए बातचीत शुरू हुई है, लेकिन हिज़्बुल्लाह इस फैसले से बिल्कुल खुश नहीं है. हिज़्बुल्लाह के एक बड़े नेता ने इन बातचीत को सरेंडर यानी आत्मसमर्पण बताया है. उन्होंने साफ कर दिया है कि इस समझौते में उनका कोई हाथ नहीं है और वे इसे नहीं मानेंगे.

हिज़्बुल्लाह ने बातचीत को क्यों नकारा?

हिज़्बुल्लाह के सीनियर अधिकारी Mahmoud Qamati ने कहा कि लेबनान सरकार और इसराइल के बीच चल रही बातें कमज़ोर और हार मान लेने वाली हैं. उन्होंने इसे सरेंडर करार दिया और कहा कि यह बातचीत हिज़्बुल्लाह से संबंधित नहीं है. उनका मानना है कि वे 2024 जैसी पुरानी शर्तों पर वापस नहीं जाएंगे जहां एक पक्ष ने बात मानी और इसराइल अपनी जिम्मेदारियों से बच निकला.

लेबनान और इसराइल के बीच क्या चल रहा है?

अमेरिका की मदद से वॉशिंगटन में 14 अप्रैल 2026 को दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत शुरू हुई थी. 16 अप्रैल से 10 दिनों के लिए युद्ध रोकने का फैसला लिया गया ताकि स्थायी शांति समझौते पर चर्चा हो सके. लेबनान चाहता है कि इसराइल अपनी सेना वापस ले और कैदियों को छोड़े, जबकि इसराइल का कहना है कि वे सुरक्षा के लिए लेबनान में बने रहेंगे और हिज़्बुल्लाह के हथियारों को खत्म करना चाहते हैं.

ताज़ा घटनाक्रम और मुख्य जानकारियां

संस्था/व्यक्ति मुख्य भूमिका/स्टैंड
Hezbollah बातचीत को सरेंडर बताया और इसे खारिज किया
लेबनान सरकार सीधी बातचीत के लिए तैयार और इसराइली सेना की वापसी की मांग
इसराइल सरकार सुरक्षा ज़ोन बनाने और हिज़्बुल्लाह को निशस्त्र करने पर जोर
अमेरिका बातचीत करवाने और युद्ध रोकने में मध्यस्थ की भूमिका
14 अप्रैल 2026 वॉशिंगटन में पहली बार उच्च स्तरीय बातचीत शुरू हुई
16 अप्रैल 2026 10 दिनों के लिए युद्ध विराम (Ceasefire) लागू हुआ
18 अप्रैल 2026 इसराइल ने दक्षिणी लेबनान में ‘येलो लाइन’ बनाई और हमला किया

इसी बीच 18 अप्रैल को दक्षिणी लेबनान में संयुक्त राष्ट्र (UN) के शांति सैनिकों पर हमला हुआ जिसमें एक फ्रांसीसी सैनिक की मौत हो गई. लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun ने इस हमले की निंदा की है और दोषियों को पकड़ने का वादा किया है.