Hezbollah ने अमेरिका के फैसले को नकारा, ईरान के संगठन से जुड़ने पर दी सफाई.

लेबनान के प्रमुख राजनीतिक और सैन्य संगठन Hezbollah ने अमेरिका के उस नए फैसले को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें उसे ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC-QF के नियंत्रण में काम करने वाला संगठन बताया गया था। संगठन की तरफ से यह आधिकारिक बयान शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को जारी किया गया, जिसमें अमेरिकी प्रशासन के दावों को बेबुनियाद बताया गया है।
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब अमेरिका के US Treasury Department के Office of Foreign Assets Control (OFAC) ने गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को एक औपचारिक आदेश जारी किया। इस आदेश में Hezbollah को सीधे तौर पर ईरान की सेना की एक शाखा से जोड़ने का नया प्रावधान लाया गया। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह नया बदलाव संगठन को एक अलग इकाई मानने के बजाय उसे सीधे तौर पर ईरान का प्रॉक्सी साबित करता है, जिसके सैन्य और वित्तीय नेटवर्क तेहरान के इशारे पर काम करते हैं।
अमेरिका ने लगाए कैश स्मगलिंग के गंभीर आरोप
इस नए री-डेजिग्नेशन के साथ ही अमेरिका ने कड़े कदम उठाते हुए 10 ऐसे लोगों पर प्रतिबंध लगा दिया है जिन पर अवैध रूप से कैश स्मगलिंग करने का गंभीर आरोप है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ये लोग लेबनान, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE और ईरान के बीच चलने वाली कमर्शियल उड़ानों के जरिए सैकड़ों मिलियन डॉलर की रकम गैरकानूनी तरीके से इस संगठन तक पहुंचा रहे थे। अमेरिका का मानना है कि इन पैसों का इस्तेमाल सैन्य गतिविधियों को बढ़ाने के लिए किया जाता है.
इन तमाम गंभीर आरोपों का जवाब देते हुए Hezbollah ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह किसी भी तरह से तेहरान के सीधे नियंत्रण में नहीं है। हालांकि, संगठन ने ईरान की सरकार के साथ अपने बेहद करीबी और दोस्ताना रिश्तों को छुपाया नहीं बल्कि इसे अपने लिए गर्व की बात बताया। संगठन के नेताओं का साफ कहना है कि ईरान के साथ उनके वैचारिक और रणनीतिक संबंध जगजाहिर हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे किसी के निर्देश पर काम करते हैं।
राजनीतिक और वित्तीय दबाव बनाने की कोशिश
संगठन के अधिकारियों ने अमेरिका द्वारा लगाए गए इन प्रतिबंधों और नए प्रशासनिक फैसलों को एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश बताया है। उनका आरोप है कि यह कदम केवल राजनीतिक और वित्तीय दबाव बनाने के लिए उठाया गया है ताकि क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित किया जा सके। संगठन का यह भी दावा है कि अमेरिका की ऐसी नीतियां सीधे तौर पर इसराइल के सुरक्षा हितों को साधने का काम करती हैं और इसके पीछे दक्षिण लेबनान पर अपने कब्जे को मजबूत करने की मंशा छिपी हुई है।
अपने आधिकारिक बयान के आखिर में Hezbollah ने दो टूक शब्दों में यह भी कहा कि अमेरिका के ये तमाम नए प्रतिबंध और दबाव उनके तेवर को कमजोर नहीं कर पाएंगे। संगठन ने स्पष्ट किया कि वे अपने प्रतिरोध के रास्ते से पीछे हटने वाले नहीं हैं और अमेरिकी प्रशासन की ऐसी कार्रवाइयों से उनके रुख में कोई बदलाव नहीं आएगा। इस पूरी घटना की विस्तृत जानकारी ANI News के माध्यम से सामने आई है।