लेबनान के हिज़्बुल्लाह ने एक बार फिर इसराइल पर बड़ा हमला कर दिया है। 15 अप्रैल की सुबह हिज़्बुल्लाह ने उत्तरी इसराइल के इलाकों में कई रॉकेट दागे। यह हमला ऐसे समय में हुआ जब वॉशिंगटन में इसराइल और लेबनान के बीच शांति के लिए सीधी बातचीत चल रही थी। इस घटना के बाद इलाके में तनाव और बढ़ गया है।
रॉकेट हमले में क्या हुआ और कितना नुकसान हुआ?
इसराइल के चैनल 12 के मुताबिक करीब 20 रॉकेट दागे गए, लेकिन कुछ अन्य रिपोर्टों में यह संख्या 40 तक बताई गई है। इन रॉकेटों ने किरयात शमोना और अपर गैलिली के इलाकों को निशाना बनाया। IDF ने जानकारी दी कि उनके डिफेंस सिस्टम ने 8 रॉकेट हवा में ही मार गिराए, जबकि बाकी रॉकेट खुले मैदानों में गिरे। इस हमले के दौरान तामरा इलाके में मलबे की चपेट में आने से एक 61 साल का व्यक्ति हल्का घायल हो गया।
वॉशिंगटन की बातचीत और दोनों देशों का क्या कहना है?
14 और 15 अप्रैल को वॉशिंगटन में लेबनान और इसराइल के अधिकारियों के बीच बातचीत हुई, जिसमें अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो भी मौजूद थे। इस बैठक में इसराइल ने हिज़्बुल्लाह के निशस्त्रीकरण यानी हथियार छोड़ने की मांग की। वहीं लेबनान ने तुरंत युद्धविराम और मानवीय संकट को दूर करने की बात कही। हिज़्बुल्लाह नेता नईम कासिम ने इस बातचीत को बेकार बताते हुए लेबनानी सरकार से इसे रद्द करने को कहा है।
लेबनान और इसराइल के बीच अब तक क्या स्थिति है?
लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक पिछले 24 घंटों में इसराइल के हमलों में कम से कम 35 लोग मारे गए हैं। लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन ने कहा कि शांति के लिए इसराइली सेना को पीछे हटना होगा और लेबनानी सेना को सीमा पर तैनात होना होगा। दूसरी तरफ, अमेरिका ने कहा कि इसराइल को अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है, जिससे संकेत मिलता है कि इसराइल के हमले और जमीनी कार्रवाई जारी रह सकती है।
